फतेहपुर । रमजान का महीना नेमतों, बरकतों और गुनाहों से माफी के लिए है । इस महीने में रोजेदार रोजा रखने के दूसरे नेक अमल और कुरान की तिलावत करते हैं । रोजेदार को यही आदत है पूरे साल के लिए लागू करना चाहिए ।
रमजान को तीन हिस्सों यानी अशरों में बांटा गया है । जिसमें पहला हिस्सा रहमत,दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से निजात का होता है । पहला अशरा दस दिन समाप्त हो गया । दूसरा यानी मगफिरत का अशरा चल रहा है इसमें अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत करता है ।
तीसरा अशरा यानि रमजान के आखिरी दस दिन जहन्नम से निजात के होते हैं । उलेमा के मुताबिक रोजेदारों को चाहिए कि वह रमजान के दूसरे अशरे में कसरत के साथ इबादत, लोगों की मदद,कुरआन की तिलावत और दूसरे नेक अमल कर अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगें । रमजान के महीने में रोजेदार झूठ,चुगली और हर तरह के दूसरे गुनाहों से बचने की कोशिश करते हैं और गरीबों की मदद करते हैं । उलेमा फरमाते हैं कि एक महीने ऐसा करने के बाद इन्हीं आदतों को पूरे साल के लिए खुद पर लागू करना चाहिए । भूखे पेट दिनभर गुजारने के बाद गरीबों की भूख का भी एहसास होता है । ऐसे में जरूरतमंदों की मदद करने का जज्बा भी पैदा होता है ।
इनसेट—
इफ्तार कराने वाले को रोजेदार के बराबर अज्र
रोजेदार को रोजा इफ्तार कराने वाले को भी रोजेदार के बराबर अज्र दिया जाता है । इसको पाने के लिए कई लोग रोजा इफ्तार की दावत देते हैं । इसी कड़ी में इफ्तार की दावत का इंतेजाम जगह-जगह किया जाता है । जिसमें सैकड़ों लोग शिरकत करते और नमाज अदा कर दुआ मांगते ।
