नई दिल्ली । भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जॉयमाल्या बागची को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई ।
न्यायालय परिसर में आयोजित एक समारोह में शीर्ष न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में शपथ दिलाई गयी । न्यायमूर्ति बागची के शपथ ग्रहण के साथ ही शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 के मुकाबले 33 हो जाएगी ।
सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में सीजेआई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने कहा कि कॉलेजियम ने 6 मार्च को अपनी बैठक में सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के लिए पात्र उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ अवर न्यायाधीशों के नामों पर विचार-विमर्श किया ।
10 मार्च को केंद्र सरकार ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी जस्टिस बागची 2031 में जस्टिस के वी विश्वनाथन की जगह भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में होंगे ।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची को 27 जून 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था 4 जनवरी 2021 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था । 8 नवंबर 2021 को उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय में वापस भेज दिया गया । तब से वे वहीं कार्यरत हैं वे 13 वर्षों से अधिक समय तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं । अपने लंबे कार्यकाल के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कानून के विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया है ।
18 जुलाई 2013 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर के सेवानिवृत्त होने के बाद, कलकत्ता उच्च न्यायालय से भारत का कोई भी मुख्य न्यायाधीश नहीं हुआ है ।
25 मई 2031 को न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन के सेवानिवृत्त होने पर, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची 02 अक्टूबर 2031 को अपनी सेवानिवृत्ति तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे । न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची का भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण करने से पहले छह वर्ष से अधिक का कार्यकाल होगा ।
