नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साज़िश के मामले में उमर ख़ालिद को ज़मानत न देने के अपने ही फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं ।
लाइव लॉ के मुताबिक़ कोर्ट ने कहा कि यह फ़ैसला 2021 में तीन जजों की बेंच के यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम केए नजीब के फ़ैसले का ठीक से पालन नहीं करता । उसमें कहा गया था कि अगर केस की सुनवाई बहुत लंबी खिंच जाए तो ग़ैरक़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) मामलों में भी ज़मानत दी जा सकती है ।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने यह बातें उस समय कहीं जब उन्होंने सैयद इफ्तिख़ार अंद्राबी की ज़मानत मंज़ूर की ।
अंद्राबी 6 साल से जेल में हैं और उन पर आरोप है कि उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी से ‘आतंकवाद’ को फ़ंड किया ।
अदालत ने कहा “उमर ख़ालिद को जमानत न देने के फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच के फ़ैसले का पालन नहीं किया गया बेल नियम है और जेल अपवाद,यह सिद्धांत यूएपीए जैसे कड़े क़ानूनों में भी लागू होता है ।”
कोर्ट ने 2024 में हुए गुरविंदर सिंह बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के फ़ैसले पर भी नाराज़गी जताई, क्योंकि उसमें केए नजीब के फ़ैसले को लागू नहीं किया गया ।
