– बाढ़ का खतरा अभी दूर, लेकिन कछार की बस्तियों पर बढ़ी निगाह; हर पल दर्ज हो रही नदियों की धड़कन
प्रयागराज । पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का असर अब संगम नगरी में साफ दिखाई देने लगा है । गंगा और यमुना ने धीरे-धीरे अपना तेवर बदलना शुरू कर दिया है । नदी का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है ।
यही वजह है कि जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है । बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है । राहत एवं बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को समय रहते सचेत करने के लिए विशेष टीमें लगातार गांव-गांव और बस्तियों तक पहुंच रही हैं । सबसे अधिक चिंता कछारी इलाकों में रहने वाले परिवारों को लेकर है । जहां नदी का थोड़ा-सा भी फैलाव जनजीवन को प्रभावित कर सकता है ।
हालांकि राहत की बात यह हैकि गंगा और यमुना दोनों नदियां अभी भी चौरासी दशमलव सात तीन चार मीटर के खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं,लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्रशासन की निगरानी और सतर्कता दोनों बढ़ा दी हैं । शनिवार रात आठ बजे तक यमुना का जलस्तर इकहत्तर दशमलव नौ शून्य मीटर दर्ज किया गया । जबकि फाफामऊ में गंगा छिहत्तर दशमलव दो सात मीटर और छतनाग में इकहत्तर दशमलव एक छह मीटर पर बह रही थी । इस दौरान यमुना का जलस्तर अठारह सेंटीमीटर प्रति घंटे,फाफामऊ में गंगा एक सेंटीमीटर प्रति घंटे तथा छतनाग में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ऊपर चढ़ रही थी । इससे पहले सुबह आठ बजे तक नदियों का मिजाज और भी तेज़ था । यमुना अठारह सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी । जब कि फाफामऊ में गंगा बारह सेंटीमीटर प्रति घंटे और छतनाग में बाईस सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से ऊपर उठ रही थी । हालांकि लगभग बारह घंटे बाद शाम तक गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई, जिससे प्रशासन ने थोड़ी राहत की सांस ली । इसके बावजूद अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं । क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर अगले कुछ दिनों में मैदानी इलाकों की नदियों पर और स्पष्ट दिखाई दे सकता है । ऐसे में प्रशासन का पूरा जोर एहतियात, निगरानी और समय रहते लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है ।
