– चौंसठ वर्ष पुराना पानी टंकी आरओबी इतिहास बना, इक्यावन करोड़ पचास लाख की लागत से खड़ा होगा आधुनिक सेतु, जाम से मिलेगी बड़ी राहत
प्रयागराज । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सामने वर्षों तक शहर की धड़कनों को जोड़ने वाला पानी टंकी रेलवे ओवरब्रिज अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है । लगभग चौंसठ वर्ष तक हजारों वाहनों और लाखों लोगों का भार उठाने वाले इस पुराने पुल को हटाकर अब उसी स्थान पर आधुनिक तकनीक से नए रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण तेज़ी से शुरू कर दिया गया है । राज्य सेतु निगम की देख रेख में बनने वाला यह दो लेन का अत्याधुनिक पुल इक्यावन करोड़ पचास लाख रुपये की लागत से तैयार होगा । इसकी कुल लंबाई पांच सौ सत्तावन दशमलव चार तीन दो मीटर होगी और निर्माण कार्य मई दो हजार अट्ठाईस तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।
अधिकारियों का दावा है कि कार्य तय समय से पहले पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है । पुराने पुल के समानांतर हाल ही में दो लेन का नया ओवरब्रिज चालू किया गया है । जिस पर फिलहाल पूरा यातायात संचालित हो रहा है । इसी कारण पानी टंकी चौराहे पर रोज़ाना वाहनों का दबाव बढ़ रहा है और लंबा जाम लोगों की परेशानी का कारण बना हुआ है । नया पुल तैयार होने के बाद दोनों ओर से यातायात का सुचारु संचालन संभव होगा और शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल इस क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है । यह ओवरब्रिज केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं था, बल्कि पुराने शहर,सिविल लाइंस और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के बीच दशकों से जीवनरेखा बना हुआ था । महाकुंभ दो हजार पच्चीस से पहले तकनीकी जांच में इसे असुरक्षित घोषित किया गया । मेला समाप्त होने के बाद अप्रैल दो हजार छब्बीस में भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और मई से इसका ध्वस्तीकरण शुरू हुआ । अब पुराने पुल का अधिकांश हिस्सा हटाया जा चुका है तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह से नए पुल की नींव को आकार देने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है ।
परियोजना प्रबंधक रोहित मिश्रा के अनुसार नए ओवरब्रिज का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के अनुरूप किया जा रहा है । निर्माण सामग्री लगातार स्थल पर पहुंच रही है और पुल को मजबूत आधार देने के लिए चौदह पिलरों का निर्माण किया जाएगा । इन पिलरों के लिए सरिया का जाल तैयार किया जा रहा है,जिससे संरचना अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बन सके। सबसे अधिक चौंकाने वाला तथ्य पुराने पुल को तोड़ने के दौरान सामने आया। ध्वस्तीकरण में लगे कर्मचारियों को अपेक्षा से कहीं अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा । पुल की चिनाई राबिश और चूने से इस मजबूती के साथ की गई थी कि उसे तोड़ते समय ईंटें तक साबुत नहीं निकल सकीं । पुल में प्रयुक्त मोटे सरिए आज के बाजार में लगभग देखने को नहीं मिलते ।
हैरानी की बात यह रही कि चौंसठ वर्षों तक मौसम की मार झेलने के बावजूद उन सरियों पर जंग का नामोनिशान नहीं था। यह पुरानी निर्माण कला की गुणवत्ता और उस दौर की इंजीनियरिंग क्षमता का ऐसा प्रमाण बनकर सामने आया जिसने ध्वस्तीकरण में जुटे अनुभवी कर्मियों को भी आश्चर्यचकित कर दिया । अब शहर की निगाहें उस नए पुल पर टिकी हैं,जो केवल यातायात का नया मार्ग नहीं बनेगा, बल्कि प्रयागराज की बदलती शहरी तस्वीर, सुरक्षित आवागमन और भविष्य की बढ़ती जरूरतों का मजबूत आधार भी साबित होगा ।
