नई दिल्ली । दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को अहम टिप्पणी की । CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा- “आप किसी जगह पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते । अन्य प्रदर्शनकारी भी हैं। किसान या वकील ,पत्रकार कहां जाएंगे ? हर किसी को विरोध करने का अधिकार है ।”
यह सुनवाई CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में हुए विपक्षी दलों के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर हो रही थी । कोर्ट में किराना कमेटी दिल्ली सहित व्यापारी संगठनों ने याचिका दायर कर कहा था कि प्रदर्शनों के कारण त्योहारी सीजन में 50 लाख लोगों वाले इलाके में दुकानें बंद हैं और कनॉट प्लेस में कोई नहीं आ रहा ।
CJI ने कहा कि तयशुदा प्रदर्शन स्थल भी एक निश्चित समय के लिए ही दिए जाने चाहिए ।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जंतर-मंतर पर केवल एक दिन की अनुमति दी गई थी । लेकिन प्रदर्शनकारियों ने 17 दिन तक कब्जा रखा और संसद तक मार्च किया । उन्होंने कहा “संसद सिर्फ एक राजनीतिक इमारत नहीं है। आप संसद या सुप्रीम कोर्ट तक मार्च नहीं कर सकते ।”
केंद्र ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई कर दिया है और तीन नए वैकल्पिक स्थल- रामलीला मैदान,बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड प्रस्तावित किए हैं ।
बेंच ने व्यापारी संगठनों को निर्देश दिया कि वे अपनी याचिका में प्रदर्शन के आयोजकों को भी पक्ष बनाएं तभी कोर्ट कोई फैसला कर सकता है ।
