फतेहपुर : श्री नीलकंठेश्वर रासलीला कमेटी द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण रासलीला के छठवें दिन वृन्दावन धाम के ख्यातिलब्ध कलाकारों ने सुदामा चरित्र का मंचन करते हुए बताया कि संसार में मित्रता श्री कृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए । सुदामा के आने की खबर मिलने पर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए उन्हें लेने गए ।

पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल से पग धोए, अर्थात श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा के आगमन पर उनके पैर धोने के लिए पानी मंगवाया, ।
परन्तु सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतना दुख हुआ है कि प्रभु के आंसुओं से ही सुदामा के पैर धुल गए । आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर वे एक दुसरे को भूल जाते है । जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनाना चाहिए । भगवान से बनाया गया रिश्ता जीव को मोक्ष की ओर ले जाता है । लीला मंचन में बताया कि स्वाभिमानी सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सखा कृष्ण का चिंतन और स्मरण नहीं छोड़ा । इसके फलस्वरूप कृष्ण ने भी सुदामा को परम पद प्रदान किया । सुदामा चरित्र का प्रसंग देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए ।
इस दौरान श्री नीलकंठेश्वर रासलीला कमेटी के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहें ।
