रिपोर्ट – रवीन्द्र त्रिपाठी
फतेहपुर । गांव स्तर पर जाब कार्डधारी मजदूरों को रोजगार देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को भले ही प्रभावी माना जा रहा हो लेकिन नियम कायदों को बलाए ताक रख जिस तरह से जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं उससे मजदूरों का तो भला नहीं हो रहा लेकिन प्रधान,सचिव एवं रोजगार सेवकों की तिकड़ी फल-फूल रही है । ग्राम पंचायतों के सोशल आडिट में भी होता है बडा खेल ।
बोगस जॉब कार्डधारकों के नाम से बिना काम के ही पैसा निकालने का खेल खूब खेला जा रहा है । अप्रैल से लेकर दिसंबर तक 9 माह में ही 13 विकास खंडों की टाप-5 की 65 ग्राम पंचायतों में ही ₹74.17 करोड़ रुपए की भारी-भरकम धनराशि खर्च कर डाली गयी ।
गांवों का विकास हो न हो लेकिन गांवों की तस्वीर बदलने का जिम्मा उठाए तिकड़ी की मनरेगा कमाऊ पूत बन गई है ।
फतेहपुर जिले के 13 विकास खंडों की 834 ग्राम पंचायतों में 478600 जॉब कार्डधारी मजदूर हैं । लेकिन एक्टिव जॉब कार्डधारियों की संख्या 233800 ही है । इनमें भी बड़ी संख्या में बोगस जॉब कार्डधारी हैं । जो केवल 500-1000 रुपए के बदले महीने भर की हाजिरी का पैसा प्रधान व सचिव तक पहुंचाते हैं । वसूली के इस खेल में रोजगार सेवक अहम भूमिका निभा रहे हैं । मनरेगा के तहत होने वाले कामों में नियम कायदों की खूब धज्जियां उड़ाई जा रही हैं । विकास खंड स्तर पर अफसरों की सेटिंग का ही नतीजा है कि कोई तो 5-10 लाख का काम करा रहा है तो कोई 50 लाख से 1 करोड तक की धनराशि मनरेगा में खर्च कर रहा है । मौजूदा वित्तीय वर्ष 2022-23 पर अगर नजर डाली जाए तो 13 विकास खंडों की टाप-5 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा में मोटी रकम को खर्च कर दिया गया । गांवों का विकास कितना हुआ यह तो जिम्मेदार जाने लेकिन पैसा पानी की तरह बहाया गया ।
ऐरायां विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में 137.95 लाख,अमौली विकास खंड की ग्राम पंचायतों में ₹196.45 लाख,असोथर विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में ₹5486.35 लाख, बहुआ विकास खंड की ग्राम पंचायतों ₹106.6 लाख,भिटौरा विकास खंड की ग्राम पंचायतों में ₹194.96 लाख, देवमई विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में 95.82 लाख खर्च कर दिए गए । धाता विकास खंड की टॉप-5 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत ₹105.99 लाख रुपए की धनराशि खपा दी गयी है ।
हथगांव विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में ₹255.79 लाख,खजुहा विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में ₹116.27 लाख, मलवां विकास खंड की टॉप-5 ग्राम पंचायतों में ₹134.12 लाख की धनराशि खर्च की गई है ।जबकि तेलियानी विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में ₹193.16लाख की धनराशि खर्च की गई है ।
जबकि विजयीपुर विकास खंड की टाप-5 ग्राम पंचायतों में ₹215.78लाख की धनराशि खर्च की गई है । कुल मिलाकर 9 महीने में ही 65 ग्राम पंचायतों में ₹7417.76 लाख रुपए की धनराशि को खर्च कर दिया गया है । मनरेगा कामों में जिस तरह से लूट मची है उसे देखने वाला कोई नहीं है ।
जांचों के नाम पर हो रही खाना पूरी एवं विकास खंड स्तर के अधिकारियों के ढाल बनने का नतीजा है कि मनरेगा जाब कार्डधारी मजदूरों को काम दिलाने की नहीं बल्कि जिम्मेदारों के दाम कमाने की मशीन बन गई है ।
इंसेट—-
सोशल आडिट में भी खेल……..
फतेहपुर ग्राम पंचायतों में सोशल में भी बड़ा खेल चल रहा है । अधिकांश ग्राम पंचायतों का सोशल आडिट खुली आम बैठक में न होकर ग्राम प्रधानों की चाहार दीवारी में बैठ हो जाती है ।
प्रधान के खास लोग ही सब ठीक-ठाक है के बयान दर्ज कराकर ग्राम सभा में कराए गए कार्यों में इमानदारी की मोहर लगा देते हैं । इसके बदले सोशल आडिट टीम को खुश कर दिया जाता है । घर में ही बैठ कर टैगिंग का काम पूरा हो जाता है । अगर ईमानदारी से जांच हो तो ग्राम पंचायतों में चल रहे खेल में बड़ा फर्जी वाडा सामने आएगा ।
ग्राम पंचायतों में सरकार की मंशा के अनुरूप कितना विकास हो रहा है और प्रधान अपने सचिव व पंचायत रोजगार सेवक के जरिए स्वयं का कितना विकास कर रहे हैं ।
