वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को संसद में 2023-24 के लिए आम बजट पेश करेंगी । मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई जिसके बाद वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वे पेश किया ।
आर्थिक सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि 2023-24 में भारत की जीडीपी 6-6.8 फ़ीसदी की दर से बढ़ेगी ।
बजट से लोगों को क्या उम्मीद ?
कई जानकार मानते हैं कि रियल स्टेट सेक्टर के लोगों की नज़र इस बजट पर टिकी हुई है । आशा जताई जा रही है कि रियल स्टेट सेक्टर में सरकार सुधार ला सकती है जिसकी इस सेक्टर को ज़रूरत है । कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि रियल स्ट्रेट इंडस्ट्री चाहती है कि होम लोन पर मिलने वाली छूट को दो लाख से बढ़ा कर पांच कर दिया जाए ।
आर्थिक सर्वे कहता है कि कृषि के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार अपने बजट में किसानों को थोड़ी राहत दे सकती है ।
कोविड महामारी के बाद रूस-यूक्रेन जंग के कारण दुनिया पर आर्थिक मंदी का साया मंडरा रहा है । युद्ध के कारण दुनियाभर में मंहगाई बढ़ी है । पश्चिम के देशों पर भी इसका असर दिख रहा है और कई बड़ी कंपनियों ने हाल-फ़िलहाल में छंटनी भी की है । ऐसे में आम आदमी के लिए बजट में क्या होगा इस पर सबकी नज़र है ।
हाल ही में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बयान दिया था कि वह खुद मध्य वर्ग से हैं और इस वर्ग की परेशानियों को समझती हैं ।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस बजट में सरकार मध्यम वर्ग के लिए भी कुछ खास कर सकती है ।
आर्थिक सर्वे में क्या आया सामने –
√ देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वर ने मंगलवार को देश के आर्थिक सर्वे की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वित्तीय साल 2023-24 में विकास दर 6-6.8 फ़ीसदी तक होने का अनुमान है ।
√ अर्थव्यवस्था की रिकवरी पूरी हो चुकी है । नॉन-बैंक और कॉरपोरेट की बैलेंस शीट बेहतर दिख रही है और महामारी से उबरने की चिंता दूर हे गई है । अब हमें आगे के चरणों पर फ़ोकस करना है ।
√ आर्थिक सर्वेक्षण 2023 में कहा गया है कि देश की 65 फ़ीसदी (2021 का आंकड़ा) आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 47 फ़ीसदी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है । ऐसे में ग्रामीण विकास पर सरकार का फोकस ज़रूरी है । कृषि के क्षेत्र में निजी निवेश 9.3 फ़ीसदी रहा है । इस क्षेत्र में बेहतर ग्रोथ दिख रही है ।
√ आने वाले वित्तीय साल में संभावनाएं बेहतर हैं क्योंकि बैलेंस शीट बेहतर स्थिति में है । इंडस्ट्रिल प्रोडक्शन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्शन बीते दो साल की तुलना में बेहतर हुआ है । एमएसएमई सेक्टर में क्रेडिट की मांग बढ़ी है ।
√ आर्थिक सर्वे कहता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास और मंहगाई को काबू में करने के कारण ये संभव है कि देश में विदेशी निवेश एक बार फिर बढ़े ।
√ सर्वे में कुछ चिताएं भी जताई गई हैं । इसमें कहा गया है कि भारत का वैश्विक मंदी की आशंकाओं के कारण एक्सपोर्ट कम हो सकता है । ये भी संभव है कि दुनिया में कमोडिटी की अस्थिर कीमतें औऱ सप्लाई चेन प्रभावित होने पर औद्योगिक विकास प्रभावित हो ।
