सहारनपुर में निकाय चुनाव में इस बार खासा उलट-फेर दिखाई दे रहा है । नगर निगम में जहां भाजपा और बसपा मुख्य मुकाबले में दिख रही है । सपा भी कई इलाकों में बसपा से जूझती दिख रही है ।
सहारनपुर में निकाय चुनाव में इस बार खासा उलट-फेर दिखाई दे रहा है। नगर निगम में जहां भाजपा और बसपा मुख्य मुकाबले में दिख रही है ।
वहीं सपा की साइकिल भी कई इलाकों में बसपा से जूझती दिखाई दी। नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी भाजपा और बसपा ही मुख्य टक्कर में दिख रही है ।
हालांकि कुछ स्थानों पर सपा और निर्दलीय भी भाजपा को टक्कर देते दिखाई दिए। 13 मई को मतगणना के बाद यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा ।
नगर निगम पर मेयर सीट के लिए भाजपा से डा. अजय कुमार, बसपा से खदीजा मसूद, सपा से नूर हसन मलिक,कांग्रेस से प्रदीप वर्मा सहित आप और तीन निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं । बीते टर्म में भाजपा के पास मेयर सीट थी तो इस पर दोबारा केसरिया फहराने के लिए पार्टी के नेताओं ने दिन-रात एक किया। यहां तक मुख्यमंत्री ने यहां भाजपा के लिए वोट मांगे । सहारनपुर से ही प्रदेश के निकाय चुनावों का श्रीगणेश किया ।
इसके अलावा बसपा के लिए भी यह सीट खासी अहम हैं । दरअसल, सहारनपुर मायावती की कर्मभूमि रही है । वह यहां से दो बार चुनाव लड़कर सूबे की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं । यहां तक कि शब्बीरपुर कांड को लेकर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था । लेकिन,पिछले कुछ समय से बसपा की पकड़ यहां से ढीली होती जा रही है । परिणाम यह रहा कि बीते साल हुए विधान सभा चुनाव में तमाम प्रयास के बाद भी एक भी सीट पर बसपा का हाथी नहीं द पाया । अब मेयर पद पर बसपा का झंडा फहराने के लिए उन्होंने कद्दावर नेता माने जाने वाले इमरान मसूद को बसपा में शामिल किया । उन्हें वेस्ट यूपी का संयोजक भी बनाया । यहां पर इमरान मसूद की भाभी खदीजा मसूद बसपा से मेयर चुनाव की प्रत्याशी है । लेकिन, प्रतिष्ठा सीधी दांव पर इमरान मसूद की लगी है । हालांकि इमरान मसूद ने चुनाव में खासी मेहनत की है ।
सपा को भी मेयर सीट पर कम नहीं आंका जा सकता । सहारनपुर देहात सीट से सपा विधायक आशु मलिक के भाई नूर हसन मलिक मेयर पद के प्रत्याशी हैं । आशु मलिक का सपा की सियासत में बड़ा कद माना जाता है । यही कारण हैं कि प्रचार के अंतिम दिन अखिलेश यादव ने भी रोड शो किया था । कई क्षेत्रों में साइकिल हाथी पर भारी पड़ती नजर आई ।
_कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी प्रदीप वर्मा ने भी मेहनत की। पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी के बैनर पोस्टर शहर में दिखाई दिए । इसके अलावा निर्दलीय शबनम कुरैशी, आशिक अल्वी और फातिमा बेगम भी चुनाव मैदान में हैं ।
_अधिकांश पर भाजपा-बसपा ही टक्कर में –
_ देवबंद में भाजपा-सपा मुख्य मुकाबले में रहे । अन्य प्रत्याशियों ने भी दमदारी से चुनाव लड़ा । नकुड़ में भी भाजपा से एक निर्दलीय जूझते दिखाई दिए । गंगोह में भाजपा,बसपा और रालोद की कड़ी टक्कर रही । वहीं सरसावा में भाजपा-बसपा और एक निर्दलीय भी खूब लड़े । रामपुर में बसपा और भाजपा,तीतरो में सपा और बसपा ,भाजपा,बेहट में भाजपा और निर्दलीय, चिलकाना में भाजपा और बसपा टक्कर में रहे । इसी तरह छुटमलपुर में भाजपा और बसपा, नानौता में भी भाजपा,बसपा और निर्दलीय में भी कांटे की टक्कर रही। यह एक सरसरी आंकलन भर है । असली तस्वीर तो मतगणना के बाद ही साफ हो सकेगी ।
_पिछली बार भी हुई थी भाजपा-बसपा में टक्कर-
_वर्ष 2017 में भी भाजपा और बसपा के बीच कड़ी टक्कर रहा भाजपा के संजीव वालिया ने 1,19,201 वोट प्राप्त कर बसपा के फजुर्रहमान को महज 1900 मतों से हरा दिया था । उस समय भी भाजपा की जीत के पीछे मुस्लिम वोटों का बंटवारा था । क्योंकि मुस्लिम वोट सपा और काग्रेस के बीच बंटे थे । ठीक उसी तरह इस बार भी भाजपा और बसपा के बीच सीधी टक्कर है। इस बार भी नोटों का भी है ।
_नकुड़ में भी भाजपा से एक निर्दलीय जूझते दिखाई दिए । गंगोह में भाजपा, बसपा और रालोद की कड़ी टक्कर रही । वहीं सरसावा में भाजपा-बसपा और एक निर्दलीय भी खूब लड़े । रामपुर में बसपा और भाजपा,तीतरो में सपा और बसपा,भाजपा,बेहट में भाजपा और निर्दलीय,चिलकाना में भाजपा और बसपा टक्कर में रहे। इसी तरह छुटमलपुर में भाजपा और बसपा,नानौता में भी भाजपा,बसपा और निर्दलीय में भी कांटे की टक्कर रही । यह एक सरसरी आंकलन भर है। असली तस्वीर तो मतगणना के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी ।
