छत्तीसगढ़ में ईसाई आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी से बाहर करने की मांग तेज़ होती जा रही है ।
डी-लिस्टिंग या असूचीकरण की मांग ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य में अगले छह महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं ।
शैक्षणिक संस्थाओं या नौकरियों में उसी समुदाय को आरक्षण की सुविधा हासिल होती है जिनका नाम अनुसूचित जाति या जनजाति की लिस्ट में शामिल हो ।
पिछले कुछ महीनों में भाजपा और आरएसएस से जुड़े हिंदु संगठनों ने छत्तीसगढ़ में, बस्तर से लेकर सरगुजा तक डी-लिस्टिंग की मांग को लेकर कई बड़ी रैलियां की हैं । इसके जवाब में ईसाई संगठनों ने भी कुछ इलाक़ों में प्रदर्शन किया ।
