रजनीकांत शुक्ला, कानपुर ब्यूरो
कानपुर,11 जुलाई । वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत महात्मा प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज को आज कौन नहीं जानता,बड़े बड़े नामी लोग उनके दर्शन के लिए वृंदावन धाम पहुंचते हैं और लाखों लोग देश के कोने से उनके एकमात्र झलक के लिए वृंदावन की गलियों में सुबह भोर पहर खड़े नजर आते हैं ।
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्म कानपुर जिले के नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था । संत महाराज प्रेमानंद जी ने 12 वर्ष की उम्र में मां की आज्ञा के बाद घर और गांव त्याग दिया था । आज भी गांव में प्रेमानंद जी महाराज पैतृक घर बना हुआ है । जिसमें उनके अन्य परिजन रहते हैं ।
दैनिक देश की रोशनी के संवाददाता जब अखरी गांव पहुंचे और परिजनों से बात की तो प्रेमानंद जी महाराज के शुरूआती जीवन की बहुत से रहस्य सामने आए प्रेमानंद जी महाराज का वास्तविक नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था । गांव मिले प्रेमानंद जी महाराज के भतीजे भानु प्रकाश पांडे ने बताया कि उनके बाबा शंभू नारायण पांडेय के 3 पुत्र थे । जिसमें सबसे बड़े उनके पिताजी गणेश शंकर शास्त्री है दूसरे नंबर में अनिरुद्ध कुमार पांडे जो कि आज सुप्रसिद्ध संत महाराज प्रेमानंद गोविंद शरण जी के नाम से देश में जाने जाते हैं । जिनके लाखों भक्त देश भर में है और बड़े-बड़े सेलिब्रिटी उनके दर्शन के लिए वृंदावन धाम सामने आए पहुंचते हैं । तीसरे नंबर में उनसे छोटे घनश्याम पांडे हैं जो कि इस समय सरसौल में में प्राइवेट जॉब करते हैं ।
वहीं प्रेमानंद महाराज के भतीजे भानु प्रकाश ने बताया कि पिताजी पुरोहित का काम करते हैं । जब उनसे प्रेमानंद महाराज के जीवन के बारे में पूछा गया तो भतीजे द्वारा बताया गया कि पिताजी बताते थे प्रेमानंद 12 वर्ष की उम्र में मां की आज्ञा से घर और गांव छोड़कर चले गए । कुछ दिन वह बिटूर में रहे । जिसके बाद वह काशी में लगभग 15 वर्ष व्यतीत किया । जिसके बाद गौरी शरण गुरु जी से गुरु दीक्षा लेकर वह राधा बल्लभ पंत के अनुयाई होकर वृंदावन धाम में चले गए । जहां आज बड़े-बड़े सेलिब्रिटी उनके दर्शन के लिए आते हैं । वही लाखों भक्त देश के कोने कोने से वृंदावन धाम पहुंचते है । जब परिजनों से मुलाकात की बात पूछी गई तो भतीजे द्वारा बताया गया कि कुछ माह पूर्व वह वृंदावन गए थे । जहां चाचा जी से मुलाकात हुयी थी जब चाचा जी ने उनके और अन्य परिजनों के कुशल क्षेम पूछे थे ।
वही प्रेमानंद जी महाराज के छोटे भाई की बेटी श्यामा पांडेय से जब बात की गयी तो बताया कि ताऊ से उनकी बात होती है जब यह 3 वर्ष की थी तब वृंदावन गयी थी पर अब जल्दी फिर एक बार ताऊ से मिलने वृंदावन जाएगी ।
बताया कि ताऊ का 2-4 माह के दरमियान फोन आता है ।वह उनसे बात करते हैं और उन्हें सतमार्ग में चलने के 1 लिए प्रेरित करते हैं । गांव में ही मिले प्रेमानंद महाराज के बचपन के मित्र छुटकऊ यादव से जब महाराज जी के बारे बात पूछी गयी तो 1 बोले कि बचपन में सामान्य बच्चों की तरह ही प्रेमानंद भी थे पर घर में आध्यात्मिक माहौल होने के चलते वह भी बेहद ज्यादा । धार्मिक थे और भगवान के प्रति समर्पित रहते थे ।
बताते चलें प्रेमानंद जी महाराज के पिताजी भी जाने-माने गांव क्षेत्र में पुरोहित माने जाते थे । भतीजे द्वारा बताया गया कि 5 उनके परिवार में शुरूआत से ही किसी न से किसी सदस्य ने समय-समय पर घर त्याग । कर अध्यात्म और धार्मिक मार्ग चुना है । प्रेमानंद जी महाराज के बाद उसके छोटे भाई 1 शिव मंगल पांडे भी घर त्याग चुके हैं और इन 1 दिनों वृंदावन में चाचा के साथ भगवान सेवा 5 में समर्पित है ।
ज्ञात रहे प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज की दोनों की किडनी खराब हो चुकी हैं और पिछले 17 वर्ष से वह डायलिसिस एवं अध्यात्म के दम पर लोगों को सतमार्ग में चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं । जहां सुबह भोर 3 बजे से उनकी दिनचर्या चालू ब होती है । वही वह है देर शाम तक अपनी दैनिक क्रियाकलापों में व्यस्त रहते हैं । इसी दरमियान हफ्ते में 3 दिन उनकी डायलिसिस भी होती है ।
