फतेहपुर । फसलों के अवशेष व पराली जलाने वालों पर निगहबानी करने के लिए अब तहसील से ग्राम पंचायत स्तर पर सेल का गठन किया गया । पराली जलाने वालों पर कड़ी कार्यवाही हो सकती है ।
जिलाधिकारी फतेहपुर श्रीमती श्रुति ने बताया कि सर्वेच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन0जी0टी0) द्वारा निर्गत आदेशों के अनुपालन में पराली/फसल अवशेष जलाये जाने से हो रहे प्रदुषण की रोकथाम के दृष्टिगत जनपद स्तर पर एक सेल गठन किया गया है । जिसके द्वारा प्रत्येक दिन अनुश्रवण किये जाने एवं प्रत्येक ग्राम के ग्राम प्रधान एक क्षेत्रीय लेखपाल को किसी भी दशा में अपने से सम्बंधित क्षेत्र में पराली/ कृषि अपशिष्ट न जलाये जाने हेतु कृषको को जागरूक किया जाए । इसके अतिरिक्त कृषको के मध्य पराली जलाने से मिट्टी जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य से होने वाली हानि से अवगत कराया जाय जिन कृषको द्वारा पराली जलाने की घटना सामने आती है । उन पर नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाही भी की जायेगी ।
शासन द्वारा आगमी महीनों में खरीफ फसलों तथा गन्ना की कटाई के पश्चात पराली/ फसल अवशेष जलाये जाने की सम्भावना के दृष्टिगत फसलों के अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण से रोकथाम के लिये ग्राम पंचायत स्तर/न्याय पंचायत स्तर,विकास खण्ड स्तर,तहसील स्तर,पर टीम गठित कर दी गई है । जो पराली/फसल अवशेष से जलाने वाले दुष्प्रभाव को रोकने के लिए किसानों को जागरूक करे । साथ ही होने वाली नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाही से भी अवगत कराएं ।
उन्होंने कहा कि पराली/फसल अवशेष न जलाये जाने के रोकथाम के लिए पराली दो खाद लो कार्यक्रम का संचालन सफलता पूर्वक किया जाये जो गत वर्ष जनपद में किया गया था,इसके लिए गोशालाओं में ट्राली पराली के बदले एक ट्राली खाद किसानों को उपलब्ध कराई जाए । जिससे कि निराश्रित गोवंशों के लिए चारे की भरपाई तथा किसानों को अपने खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए खाद मिलेंगी जनपद स्तर पर गोष्ठी का आयोजन कर फसल अवशेष से होने वाली क्षति के सम्बंध में जागरूक करने के साथ ही मिलियन फार्मस स्कूल कार्यक्रम तथा इनसीटू योजना अंतर्गत, आई0ई0सी0 के कार्य के तहत ग्राम स्तर तक कृषको को फसल अवशेष न जलाने के लिए जन जागरूकता अभियान कर कृषको को प्रेरित किया जाय । विद्यालयो में छात्रों की सभाये आयोजित कर फसल अवशेष प्रबंधन के तहत परिचर्या एवं व्याख्यान दिया जाय । तथा इस विषय पर निबंध चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित कर छात्रों को फसल अवशेष से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाय । इस कार्य के लिए लगाए गए समस्त अधिकारी /कर्मचारी अपना व्यक्तिगत दायित्व निभाते हुए पराली/फसल अवशेष/कूड़ा जलाने की कोई घटना घटित न होने दे ।
