Edited by Amit Kumar ‘dev’
फतेहपुर : हम बात कर रहें हैं जनपद फतेहपुर में फर्जी नर्सिंग होमो,अवैध तरह से बिना किसी मानक व डिग्री के संचालित हो रहे हॉस्पिटल की जहां पर प्रतिदिन सैंकड़ों की तादाद में भ्रूण हत्या जैसी जघन्य अपराधों को संरक्षण व जिले में बैठे आला अधिकारियों द्वारा प्राप्त है जहां आये दिन भ्रूण हत्या जैसी घटनाएं लगातार प्रकाश में आ रहीं हैं बावजूद इसके जिले के आला अफसरों द्वारा ऐसे जघन्य अपराध करने वालों पर शिकंजा न कसना खुद की संलिप्तता भी जाहिर करता है । जहां कार्यवाही के लिए थानों में महीनों प्रार्थना पत्र पड़े रहने के बाद भी कार्यवाही न होना,एफआईआर दर्ज न होना जिला प्रशासन पर भी कई सवालिया निशान खड़े करता है ।
बताते चलें कि अभी हाल ही में सरकारी अस्पताल गोपालगंज पीएचसी के मुलाजिम “गुलाब सिंह पटेल” का सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था …..
जिसमें ऑन ड्यूटी अपने प्राइवेट हॉस्पिटल जो कि ताम्बेश्वर मन्दिर के पास फतेहपुर में “विकास हॉस्पिटल” के नाम से संचालित किया जा रहा था । जहां पर बैठ भ्रूण (गर्भपात) गिराने का रेट लिस्ट मान्यवर खुद ही अपने मुंह से बयां कर रहें हैं जिस पर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी कार्यवाही न कर पाने की वजह से दूसरे अवैध तरह से चल रहे । अस्पतालों के गिरोह और तेजी के साथ सक्रिय हो गया और भ्रूण हत्या का रेट बढाते हुए अट्ठारह हजार रुपये में भ्रूण गिराने की रेट लिस्ट जारी कर दी अगर हम सिर्फ शहर ऐसे फर्जी अस्पतालों व नर्सिंग होमों की बात करें तो ऐसे हजारों की तादाद में अस्पताल भ्रूण गिराने में लिप्त मिल जाएंगे तो वहीं आम्बापुर मोड़ से मण्डा सरांय के बीच संतलाल मार्केट के आस पास झोलाछाप डॉक्टरों की तो भरमार है । जहां पर बिना बोर्ड के चोरी छुपे ऐसे कामों को वृहद स्तर पर अन्जाम दिया जा रहा है तो वहीं बिन्दकी तहसील भी इससे अछूती नहीं है बिन्दकी नगर क्षेत्र में भी ऐसे जघन्य अपराधों को चोरी छुपे अंजाम दिया जा रहा है तो वहीं कुकुरमुत्तों की तरह फर्जी व अवैध तरह से चल रहे अस्पतालों कि भरमार है जिनमें से मुख्य फरीदपुर मोड़ के सामने तो दूसरा पैगम्बरपुर, सूत्रों की मानें तो वहीं नए खुले हॉस्पिटल जो कि कुंवरपुर रोड ,ललौली बांदा सागर मार्ग व मुगल रोड में कुकुरमुत्तों की मानिन्द अस्पताल खुले पड़े हैं ।
अगर हम बात करें भारतीय दंड संहिता,1860 के तहत प्रावधानों की तो भारतीय दंड संहिता की धारा 312 कहती है कि ‘जो कोई भी जानबूझकर किसी महिला का गर्भपात करता है । जब तक कि कोई इसे सदिच्छा से नहीं करता है और गर्भावस्था का जारी रहना महिला के जीवन के लिए खतरनाक न हो, उसे सात साल की कैद की सजा दी जाएगी’। इसके अतिरिक्त महिला की सहमति के बिना गर्भपात (धारा 313) और गर्भपात की कोशिश के कारण महिला की मृत्यु (धारा 314) इसे एक दंडनीय अपराध बनाता है ।
धारा 315 के अनुसार मां के जीवन की रक्षा के प्रयास को छोड़कर अगर कोई बच्चे के जन्म से पहले ऐसा काम करता है । जिससे जीवित बच्चे के जन्म को रोका जा सके या पैदा होने के बाद उसकी मृत्यु हो जाए, उसे दस साल की कैद होगी धारा 312 से 318 गर्भपात के अपराध पर सरलता से विचार करती है जिसमें गर्भपात करना,बच्चे के जन्म को रोकना,अजन्मे बच्चे की हत्या करना (धारा 316),नवजात शिशु को त्याग देना (धारा 317), बच्चे के मृत शरीर को छुपाना या इसे चुपचाप नष्ट करना (धारा 318)।
हालांकि भ्रूण हत्या या शिशु हत्या शब्दों का विशेष तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है, फिर भी ये धाराएं दोनों अपराधों को समाहित करती हैं ।
इन धाराओं में जेंडर के तटस्थ शब्द का प्रयोग किया गया है ताकि किसी भी लिंग के भ्रूण के सन्दर्भ में लागू किया जा सके । हालांकि भारत में बाल भ्रूण हत्या या शिशु हत्या के बारे में कम ही सुना गया है । भारतीय समाज में जहाँ बेटे की चाह संरचनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी हुई है,वहीं महिलाओं को बेटे के जन्म के लिए अत्यधिक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दबाव झेलना पड़ता है । इन धाराओं ने कुछ और जरूरी मुद्दों पर विचार नहीं किया है । जिनमें महिलाएं अत्यधिक सामाजिक दबावों की वजह से अनेक बार गर्भ धारण करती हैं और लगातार गर्भपातों को झेलती हैं ।
इसी बाबत सन 1964 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक समिति का गठन किया । शांतिलाल शाह नाम से गठित इस समिति को महिलाओं द्वारा की जा रही गर्भपात की कानूनी वैधता की मांग के मद्देनजर महिला के प्रजनन अधिकार के मानवाधिकार के मुद्दों पर विचार करने का काम सौंपा गया । सन 1971 में संसद में गर्भ की चिकित्सकीय समाप्ति अधिनियम,1971 (एमटीपी एक्ट) पारित हुआ जो 1 अप्रैल 1972 को लागू हुआ और इसे उक्त अधिनियम के दुरुपयोग की संभावनाओं को ख़त्म करने के उद्देश्य से गर्भ की चिकित्सकीय समाप्ति संशोधन अधिनियम (2002 का न।64) के द्वारा सन 1975 और सन 2002 में संशोधित किया गया । गर्भ की चिकित्सकीय समाप्ति अधिनियम केवल आठ धाराओं वाला छोटा अधिनियम है । यह अधिनियम महिला की निजता के अधिकार,उसके सीमित प्रजनन के अधिकार,उसके स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के अधिकार,उसका अपने शरीर के सम्बन्ध में निर्णय लेने के अधिकार की स्वतंत्रता की बात करता है लेकिन कुछ बेईमान लोग केवल कन्या भ्रूण को गिराकर इसका बेजा फायदा उठा रहे हैं ।
एमटीपी एक्ट में गर्भ को समाप्त करने की दशाएं (धारा 3), और ऐसा करने के लिए व्यक्ति (धारा 2 d) और स्थान (धारा 4) को निर्धारित किया गया है । इस अधिनियम के अनुसार निम्न दशाओं में गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी जाती है-
जहां पर ऐसे कामों को गोपनीय तरीके से अन्जाम दिया जाता है
इसी बाबत जब 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आती है तो मुख्यमंत्री बनते ही सीएम योगी ने मुखबिर योजना लागू की थी इस योजना के तहत कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी देने वाले को सरकार दो लाख रुपये का इनाम देगी ।
इस योजना के तहत प्रदेश भर के जिलों में 64 रेस्क़यू वैन चलेंगी जो महिलाओं की मदद करेंगी । लेकिन सरकार की इस कन्या भ्रूण हत्या योजना उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर में पूरी तरह से धराशायी दिख रही हैं । जहां पर एक के बाद एक अस्पताल भ्रूण हत्या के मामले में सुर्खियां बटोरता दिखाई पड़ रहा है । ऐसे अस्पतालों व नर्सिंग होमों को बिन्दकी नगर व फतेहपुर शहर के सम्भ्रांत सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त होता है । ऐसे मामलों पर जहां स्वास्थ्य विभागों को सक्रिय होना चाहिए जिससे प्रदेश सरकार की योजना पर बेहतर कार्य हो सके लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी के पास ऐसे संगीन मामले संज्ञान में आने के बाद भी संवेदनहीन बने हुए हैं और जिम्मेदार पूर्ण रूप से ऐसे कुरुरता के मामलों को नज़र अंदाज़ कर रहें हैं ।
राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2011 के दौरान देश में कन्या भ्रूण हत्या के कुल 132 मामले दर्ज किए गए । इस सिलसिले में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 58 के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया गया और 11 को दोषी ठहराया गया ।
वही यूनीसेफ (UNICEF) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सुनियोजित लिंग-भेद के कारण भारत की जनसंख्या से लगभग 5 करोड़ लड़कियां एवं महिलाएं गायब हैं ।
विश्व के अधिकतर देशों में, प्रति 100 पुरुषों के पीछे Women Foeticide लगभग 105 स्त्रियों का जन्म होता है ।
भारत की जनसंख्या में प्रति 100 पुरुषों के पीछे 93 से कम स्त्रियां हैं ।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में अवैध रूप से अनुमानित तौर पर प्रतिदिन 2,000 अजन्मी कन्याओं का गर्भपात किया जाता है ।
