Edited By Amit Kumar ‘Dev’
– खुशी इसलिए नही है कि हमें जाना पड़ा,खुशी इस बात की है कि कोई नेता के रूप में नही बल्कि भाई के रूप में बुलाया, एक बेहतर विचारधाराओं के चलते राजेश तिवारी ने खुद आवास में बुला कर पत्रकारों को जो सम्मान दिया वो काबिले तारीफ है – जनता के बेहद करीब हितैषी है,जमीनी स्तर पर लोगो से जुड़कर उहने बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का काम करते हैं । 2004 से ही राजनीति के महत्व के अलावा मानवीय मूल्यों को समझने में अपना जीवन निःस्वार्थ भाव से लगा दिया और लोगो के लिए पैदल ही चल पड़े अब ऐसे व्यक्ति के लिए समाज का निर्णय निर्णायक होना चाहिए जो समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त कर बेहतर समाज की दिशा को नया रूप दे सके ।

नेता कोई भी हो लेकिन अगर वह सामाजिक जीवन में बेहतर काम करे तो वह निश्चय ही समाज के लिए एक बेहतरीन अभिनय कर सकता है ऐसे ही एक बेहतरीन व्यक्तित्व के धनी बिन्दकी नगर के सम्भ्रांत व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और भावी प्रत्याशी उम्मीदवार- 239 विधानसभा राजेश तिवारी की बात कर रहे हैं ।
लोग उन्हें एक राजनीतिक जीवन के रूप में देखते होंगे लेकिन ऐसा नहीं है वो एक अधिवक्ता है लोगों के सुख दु:ख का सहारा भी हैं । बहुत से लोग उन्हें बिन्दकी विधानसभा से कांग्रेस पार्टी का 2022 का प्रत्याशी बनाना चाहते हैं । क्योंकि क्षेत्र की जनता इन्हें वरीयता देना चाहती है तो वहीं दूसरे और भी कई कांग्रेस पार्टी से उम्मीदवार प्रत्याशी भी मैदान पर हैं लेकिन जिस तरह से उनके द्वारा जातिवाद का जो चश्मा पहना गया है वो शायद बिन्दकी विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए उचित नहीं हो सकता जहां मुस्लिम कम्युनिटी को सिर्फ उनके द्वारा वोट बैंक के लिए इस्तेमाल तो वहीं दलित शोषित वंचित लोगों को अपने वक्ती तौर पर फायदे के लिए यूज़ कर जातिवाद का जो समीकरण बनाया जा रहा है ।
शायद वो ठीक नहीं जो आगे चलकर घातक साबित हो सकता है । लेकिन जो काबिलियत राजेश तिवारी के पास है वो शायद किसी में नहीं क्योंकि वो एक बेहतर अधिवक्ता के साथ साथ मूलरूप से बिन्दकी नगर के निवासी भी हैं जो लोगों के सुख दुःख को भलीभांति जानते व समझते हैं ।
जरूरत पड़ने पर उनके साथ बिना किसी भेदभाव व जाति, धर्म ,मज़हब से ऊपर उठकर उनके साथ कन्धों से कंधा मिलाकर उनके दु:ख दर्द में खड़े नजर आते हैं । क्षेत्र की जनता को और क्या चाहिए होता है उन्हें एक ऐसे प्रतिनिधि की आवश्यकता होती है जो जाति,धर्म से ऊपर उठकर बिना किसी भेदभाव के उनके दुःख दर्द को समझे न कि उन्हें जातिवाद के चश्में से देखे जो पत्रकारों का सम्मान करें तीज त्योहार में उनसे मुलाकात करे ।
