कानपुर । देश भर में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है । हिंदी दिवस झंडा गीत के रचयिता व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री श्याम लाल गुप्त ‘पार्षद जी को याद किया गया । झंडा गीत के रचनाकार श्यामलाल गुप्त पार्षद जी का हिंदी के प्रति योगदान किसी से छिपा नहीं है । कानपुर जनपद के नरवल कस्बा में जन्मे पार्षद प्रताप के लेख पढ़ गणेश शंकर विद्यार्थी जी से प्रभावित हुए । प्रसिद्ध उपन्यासकार पंडित भगवती प्रसाद बाजपेई के माध्यम से विद्यार्थी जी से परिचित हुए फिर 1924 में दो झंडा गीत लिखे । नवीन के साहित्यिक संस्कारों की व्यापक सुंगध से वातावरण अब तक महक रहा है ।
नरवल कस्बा निवासी सुरेंद्र अवस्थी ने कहा कि झंडा गीत … विजयी विश्व तिरंगा प्यार,झंडा ऊंचा रहे हमारा…ने आजादी के मत वालों में जोश भरा दिया था ।
इस एक गीत ने स्वतंत्रता-पूर्व भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाई थी । गंगागज निवासी रमेश कुशवाहा ने हिंदी के लिए प्राचीन काल से आधुनिक समय में नरवल में अप्रितम योगदान है बोलचाल से लेकर लेखन तक हिंदी को समृद्धि मिली है । सरसौल कस्बा निवासी फूल सिंह साहू ने कहा कि भाषा एक ऐसी कड़ी है । जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है और दूरियों को कम करने का काम करती है । चूकिं, भारत में हिंदी सबसे ज़्यादा बोली जाती है इसलिए इस भाषा को मातृ भाष का दर्जा प्राप्त है । हिंदी भाषा के सम्म्मान में 14 सितंबर को हर साल भारत में ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है । इसलिए यह दिन भारतीयों के लिए खास है ।
