कानपुर । साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था विद्योतमा द्वारा मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । गोष्ठी में शामिल सभी रचनाकारों ने अपनी अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से साहित्य की गंगा बहाई । गोष्ठी की शुरुआत कानपुर की वरिष्ठ कवित्री श्रीमती अन्नपूर्णा बाजपेई ने मां के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर किया । इकाई उपाध्यक्ष श्रीमती अर्चना तिवारी, अभिलाषा के द्वारा मां सरस्वती को काव्य पुष्प अर्पित किए गए । मां की अर्चना के पश्चात नासिक से रामकृष्ण जी,झांसी से पद्माक्षी तथा कानपुर ,दिल्ली तथा अन्य अन्य शहरों से साहित्यकार शामिल हुए ।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम काव्य पाठ ऋचा पाठक ने भगवान शिव शंकर के बहुत ही सुंदर भजन से किया । जिसे सुन सभी मंत्र मुग्ध हो गए साथ ही कामायनी शर्मा ने बहुत बेहतरीन कविता पाठ किया । अन्नपूर्णा शुक्ला की कविताएं बेमिसाल रही इकाई की उपाध्यक्ष अर्चना सिंह की रचना ने समाज में एक नई जागृति फैलाने का कार्य किया । अन्नपूर्णा बाजपेई की रचना ने सबका ध्यान आकर्षित किया उनके शेर की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं ।
“न लेना इम्तहान ऐ हसीं दिल जले आशिक का
फूंक कर घर अपना जिसने शम्मा जलाई है ।”
अर्चना तिवारी अभिलाषा के माहिया छंद बहुत ही सुंदर रहे। शिप्रा ज्ञानेंद्र सिंह ने ओज के छंद पढ़े
“जंग की कहानी लिखूँ,वीरों की जवानी लिखूँ ।
लिखने में भरा जोश,खून में रवानी भी।।” को खूब सराहा गया ।
साथ ही कानपुर के वरिष्ठ साहित्यकार धीर पाल धीर ने अपने गीत ” प्रेम समर्पण से जग सारा, गाता फिरता है बंजारा । सुना कर सभी लोगों को वाह-वाह करने को मजबूर कर दिया । रचना बहुत ही मार्मिकता और जीवन को सही राह दिखाने वाली रोशनी थी ।
श्रीमती पद्माक्षी जी की रचनाओं ने कृष्ण कन्हैया के बड़े ही सुंदर रूपों का वर्णन किया । जिसमें एक भक्त का प्रेम झलक रहा था और विकास शुक्ला (अक्षत व्योम) की रामभक्ति की रचना मन को छू गई । इसके साथ ही सुनील,पूनम,संध्या,श्रीमती सुनीता महेश्वरी ,संजय तथा रागिनी वाजपेई ने बहुत सुंदर काव्य पाठ किया तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्था के संस्थापक सुबोध मिश्रा ने बहुत ही सुंदर काव्य पाठ किया तथा सभी अथिति कवियों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम बहुत ही शानदार रहा । कार्यक्रम का संचालन उभरती कवित्री शिप्रा ज्ञानेंद्र सिंह ने किया ।
