कानपुर । नरवल तहसील ग्राम शीशुपुर-शगुनपुर गांव में प्राचीन शिव मंदिर वनखण्डेश्वर महादेव स्थापित है । जो पंचवटी के नाम से जाना जाता है ।
सावन के दूसरे सोमवार को आसपास समेत दूर-दराज से श्रद्धालु सुबह से मंदिर में पहुंच कर वनखण्डेश्वर महादेव का अभिषेक कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं । हर-हर महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया ।
वही भक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि बुजुर्ग बताते हैं कि सैकड़ों साल पहले मंदिर के स्थान पर एक बहुत घना जंगल हुआ करता था । जंगल में आम, इमली, नीम आदि के पेड़ लगे हुए थे । आस पास गांव के लोग उसी जंगल में जानवर चराने जाया करते थे ।
जंगल में एक गाय रोज अपना दूध एक नियत स्थान पर गिराकर चली जाती थी । एक दिन चरवाहे ने यह दृश्य देख लिया । उसने यह बात बुजुर्गों को बताई । जिसके बाद ग्रामीणों ने उसी स्थान की खुदाई कराई तो वहां पर एक शिवलिंग मिला ।
कहा जाता है कि एक राजा शिवलिंग को अपने दरबार में स्थापित करने के लिए सालों तक प्रयत्नशील रहे, परंतु सफल नहीं हो सके । वन के बीच शिवलिंग होने से भक्तों ने मंदिर का नाम वनखण्डेश्वर महादेव रख दिया ।
शीशुपुर गांव निवासी राहुल ने बताते हैं कि मंदिर में शिवलिंग स्वयंभू हैं । प्राचीन शिव मंदिर पांच गांवों के मध्य शीशुपुर,पौहार,नौगवां, हरचन्द्रखेड़ा,शगुनपुर स्थापित है । इसलिए इसे पंचवटी धाम के नाम से जाना जाता है ।
कहा जाता है कि शिवलिंग का रंग सुबह, दोपहर और शाम को अलग-अलग दिखाई देता है । महादेव का रुद्राभिषेक करने से भक्तों के मनोरथ पूर्ण होते हैं ।
वही अजय प्रताप सिंह बताते हैं कि सावन के सोमवार को श्रद्धालु भोर पहर ड्योढी व नजफगढ़ गंगा घाट पर स्नान करके वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं ।
कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगी हर मुराद को बाबा वनखण्डेश्वर पूरी करते हैं । यह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है ।
