अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा है कि चाबहार में कामकाज के लिए 2018 में दी गई छूट को वापस लेना, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को अलग-थलग करने की की रणनीति का हिस्सा है ।
ईरान के चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट पर अमेरिका ने पाबंदियों में जो छूट दी थी उसे ख़त्म करने का फ़ैसला किया है । अब भारत ने कहा कि इस फ़ैसले का उस पर क्या असर होगा, इसकी स्टडी की जा रही है ।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,”चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिकी सरकार की ओर से दी गई छूट वापस लेने पर जारी प्रेस बयान हमने देखा है । इस फ़ैसले का भारत पर क्या असर होगा,हम इसकी जांच कर रहे हैं ।”
2018 में अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को प्रतिबंधों से छूट दी थी । इसकी मुख्य वजह अफ़ग़ानिस्तान को ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात जारी रखने की सुविधा देना थी । उस समय अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सेना मौजूद थी ।
2023 में भारत ने चाबहार बंदरगाह के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान को 20,000 टन गेहूँ भेजा था । 2021 में इसी बंदरगाह से ईरान को इको-फ़्रेंडली कीटनाशक की सप्लाई की गई थी । लेकिन नई नीति के तहत अब ये छूट ख़त्म कर दी जाएगी ।
