फतेहपुर । कस्बा दक्षिणी फतेहपुर,मुराइटोला आस-पास आबादी के लिए जीवनरेखा माना जा सकता है । तीस से 40 साल पहले तक तालाब में पानी भरपूर रहता था । उससे आस-पास किसानों के साथ जनता के लिए पीने का पानी भी जल संस्थान उपलब्ध कराता था । कुछ साला से तालाब की सूखी जमीन पर कब्जा कर माफिया खेती करने लगे हैं ।
पिछले कुछ माह पहले ऐसे 67 लोगों को नोटिस दी गई थी लेकिन कड़ी कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं ।
करीब 40 हजार की आबादी वाले द. फतेहपुर कस्बे में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों की भरमार है । चारागाह, खाद के गड्ढों,चक रोड सहित ग्राम समाज की कीमती भूमि पर अवैध कब्जे यथावत बने हुए हैं । एक माह पूर्व चिह्नित ऐसे 67 लोगों को नोटिस तामील कराए गए थे पर किसी ने भी कब्जा नहीं छोड़ा, कार्रवाई होने के खौफ से तीन लोगों ने न्यायालय में वाद दायर कर दिया था । इसके बाद भी भू-माफिया आज तक काबिज हैं ।
गौरतलब है कि एनजीटी में भी इस तरह के मामलों को लेकर सुनवाई चल रही है ।
युवा विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर दायर प्रकरण में एन जी की ने फतेहपुर जनपद के सभी तालाबों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी है । इसके बावजूद जमीनी स्तर पर भैसौली जैसे मामलों में कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है ।
ग्राम भैसौली के मजरा बिसरौली में अब स्थिति यह है कि तालाब का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है । जहां कभी जल संचयन होता था । वहां अब स्थायी निर्माण हो चुके हैं। इससे पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ ग्रामीणों की दैनिक जिंदगी भी प्रभावित हो रही है ।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही या मिली भगत के चलते न्यायालय और पर्यावरणीय संस्थाओं के आदेशों का पालन नहीं कराया जा रहा ।
सवाल यह है कि जब तहसीलदार न्यायालय और NGT दोनों ही सख्ती दिखा चुके हैं, तो कार्रवाई आखिर क्यों नहीं हो रही यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे सरकारी जमीन पर कब्जा सिर्फ कानूनी उल्लंघन नहीं । बल्कि पूरे गांव की जीवनरेखा तालाब और जल निकासी व्यवस्थाको खत्म करने वाला गंभीर पर्यावरणीय संकट बन चुका है । अब देखना होगा कि प्रशासन जागता है या फिर तालाब का अस्तित्व यूं ही कागजों में सिमट कर रह जाएगा ।
