बिन्दकी/फतेहपुर । जनपद की धार्मिक,सांस्कृतिक,ऐतिहासिक महत्ता की घरोहर, “महर्षि भृगु” ‘तपो भूमि’पवित्र पूज्यनीय नदी “देवी माँ गंगा व माँ यमुना” के मध्य स्थित कस्बा बिन्दकी में “अक्षय तृतीया” के पावन दिन “भगवान विष्णु” के ‘छठे अवतार’ “भगवान परशुराम” के ‘जन्मोत्सव’ के उपलक्ष में “सर्व समाज विकास समिति उत्तर प्रदेश” की प्रेरणा व “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ माँ काली धाम शाखा के स्वयंसेवक” और “सिद्ध पीठ देवी काली माता धाम कमेटी”, “मन्दिर के पुजारी” जी के सहयोग से मो० ठठराही, कस्बा बिन्दकी स्थित “सिद्ध पीठ देवी काली माता धाम” में धार्मिक अनुष्ठान का कार्यक्रम हिन्दू सनातन धर्म की मान्यताओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार “भगवान परशुराम” जी की पूजा-अर्चना तिलक चन्दन लगाकर, पुष्प चढ़ा कर, माला पहनाकर, यज्ञोपवीत पहना, रक्षा सूत्र बाँध, आरती उतारकर, शंख-घण्टा बजाकर, हवन-पूजन का कार्यक्रम पूर्ण दिव्यता, भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ ।
वैदिक मन्त्रो “ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम:।”,
“ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात् ।”,
गायत्री मंत्र से हवन-पूजन कर आवाहन कर प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गयी।मन्दिर में उपस्थित सभी श्रृद्धालुओं के मस्तक पर “चन्दन- तिलक” लगाकर व हाथ की कलाई में “रक्षा सूत्र” (कलावा) बाँध कर, प्रसाद वितरण किया गया ।
मन्दिर के परिसर (गर्भ-ग्रह) में “भगवान परशुराम” जी के ‘प्राण-प्रतिष्ठा’ किए गए चित्र को स्थापित किया गया । जिस से सभी श्रृद्धालुओं एवं भक्त जनों को प्रतिदिन उनके दर्शन प्राप्त होगे एवं उनका आशीर्वाद भी सदैव प्राप्त होता रहेगा ।
‘सिद्ध पीठ श्री हनुमान मन्दिर” में भी सभी श्रृद्धालुओं व भक्तों ने विधि- विधान पूर्वक मन्दिर के गर्भ ग्रह में स्थापित विराज मान “भगवान परशुराम” जी के चित्र की पूजा-अर्चना कर “भगवान परशुराम” जी की आरती का सामूहिक गान कर आरती कर, प्रसाद वितरण करते हुए धार्मिक अनुष्ठान का कार्यक्रम सम्पन्न किया ।
कार्यक्रम में सर्व समाज विकास समिति उ०प्र० के ‘लेखा निरीक्षक’ “सात्विक शुक्ला” ने जनपद फतेहपुर स्थित “भगवान परशुराम” जी के पूर्वज “महर्षि भृगु” की पवित्र पावन “तपो भूमि” “महर्षि भृगु धाम भिटौरा” को नमन किया और बताया कि “भगवान परशुराम” “भगवान” ब्रम्हा” के ‘मानस पुत्र’ “महर्षि भृगु” के “प्रपौत्र” हैं ।
“भगवान परशुराम” जी,”महर्षि भृगु” के “प्रपौत्र” (पोते के बेटे) हैं और “भृगु वंश” के प्रसिद्ध “ऋषि जमदग्नि” के ‘पुत्र’ होने के कारण उन्हें ”भार्गव” (भृगु के वंशज) कहा जाता हैं ।
वंशानुगत सम्बन्ध में “महर्षि भृगु (ब्रह्मा के मानस पुत्र) के पुत्र महर्षि ऋचीक, महर्षि ऋचीक के पुत्र महर्षि जमदग्नि व महर्षि जमदग्नि के पुत्र भगवान परशुराम बताया। “भगवान परशुराम” जी ने ”भृगु वंश” की परंपरा और तपस्या को आगे बढ़ाया था “भगवान परशुराम” “भगवान विष्णु” जी के ‘छठे अवतार’ हैं । उनका जन्म ‘ब्राह्मण कुल’ में “ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका” के घर में हुआ था । उनके जन्म का नाम “राम” था । “भगवान परशुराम” जी ने कठोर तपस्या करके “भगवान शिव” को प्रसन्न करके कई तरह के अस्त्र-शस्त्र एवं विद्या प्राप्त की ।
“भगवान शिव” ने उन्हें “परशु एवं पिनाक धनुष” दिया एवं “अजर ,अमर” का वरदान दिया । भगवान परशुराम जी को “रामभद्र भार्गव, भृगुपति जमदग्न्य, भुगुवंशी” आदि नामों से भी जाना व पहचाना जाता हैं ।
महाभारत काल के महारथी “भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण, अकृत वर्ण, सारंगध्वज” के ”गुरु भगवान परशुराम” जी थे ।
“भगवान परशुराम” जी ने ‘सहस्त्रबाहु’ का अन्त करके अपने पिता की हत्या का बदला लिया एवं उसके आतंक का अन्त किया ।
‘क्षत्रिय सहस्त्रबाहु’ से क्रोधित होकर उन्होंने “21 बार सम्पूर्ण धरा” को “क्षत्रिय विहीन” कर देने का संकल्प ले लिया था उनका सामना कोई नही कर सका था । उनके क्रोध को शान्त करने,निर्दोष क्षत्रियो की रक्षा एवं सम्पूर्ण धरा को क्षत्रिय विहीन होने से बचने हेतु “महर्षि ऋचीक” ने समझाया था ।
“भगवान परशुराम” जी ने “अश्वमेध महायज्ञ” किया एवं “सप्तद्वीप युक्त पृथ्वी महर्षि कश्यप को दान कर” दी थी। “भगवान परशुराम” जी ने “देवराज इन्द्र” के समक्ष अपने शस्त्र त्याग करके “महेन्द्र गिरी पर्वत” पर ‘तपस्या’ हेतु चले गए थे ।
कार्यक्रम में सभी “33 कोटि देवी-देवताओं,भगवान शिव शंकर,सिद्ध पीठ देवी काली माता, भगवान परशुराम जी एवं सत्य सनातन धर्म” की जय हो की जयकारा का उद्धघोष हुआ । उद्धघोष की हुँकार पूरे प्रांगण में छा गयी । पूरा प्रांगण भक्तिमय हो गया ।
इस मौके पर प्रमुख रुप से सर्व समाज विकास समिति उ० प्र० प्रबन्धक धर्मेन्द्र मिश्र,लेखा निरीक्षक सात्विक शुक्ला, शार्विल शुक्ला, नीता शुक्ला,मन्दिर कमेटी अध्यक्ष राजू द्विवेदी व पुजारी दयाशंकर माली,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर प्रचारक रवीन्द्र जी व माँ काली धाम शाखा के स्वयंसेवक बन्धु विमलेश कुमार,विमल,हरी कृष्ण,सिद्ध पीठ श्री राम जानकी मन्दिर पुजारी नर्मदा शुक्ला, शिवदास, हरि नारायण सहित कई संख्या में मातायें-बहनें, वृद्ध, पुरुष, छोटे-छोटे बच्चे सहित श्रृद्धालु व भक्तजन एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें ।
