भारत में कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के देखते हुए अमेरिकी कंपनी गिलिएड साइन्सेज़ ने कहा है कि वो भारत को रेमडेसिविर दवा की 4.5 लाख शीशियाँ देगी ।
कंपनी ने सोमवार को ये भी कहा है वो भारत में इस दवा का उत्पादन बढ़ाने के लिए वो ज़रूरी एक्टिव फ़ार्मासुटिकल इंग्रीडिएंट (कच्चा माल) भी दान करेगी ।
गिलिएड ने कहा है कि सभी सात भारतीय कंपनियां जिनके पास रेमडेसिविर के उत्पादन का लाइसेंस है उन्होंने अपना उत्पादन बढ़ाया है । साथ ही वो सभी अपनी उत्पादन क्षमता और बढ़ाने में और स्थानीय दवा उत्पादकों की मदद लेने में जुटी हैं ।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अप्रैल 11 तारीख तक कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता 39 लाख यूनिट प्रति माह कर ली है ।
गीलिएड का कहना है कि उसके दिए एक्टिव फ़ार्मासुटिकल इंग्रीडिएंट की मदद से भारत में इस दवा का उत्पादन बिना किसी रुकावट के होने में मदद मिलेगी ।
हाल के दिनों में भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण दवा की मांग में तेज़ी से उछाल आया है ।
इस कारण सरकार ने इस महीने की शुरूआत में रेमडिसिविर और इसके एक्टिव फ़ार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी ।
भारत में कोविड-19 के गंभीर मामलों में वयस्कों और बच्चों में रेमडिसिविर के इस्तेमाल की इजाज़त दी गई है ।
Gilead Sciences Inc (GILD.O) will give India at least 450,000 vials of its COVID-19 drug remdesivir and donate active pharmaceutical ingredients (APIs) to boost production, it said on Monday, as the country reels from surging COVID-19 cases. https://t.co/3FvLhy1mpU
— Reuters Health (@Reuters_Health) April 27, 2021
गिलिएड साइंसेस की चीफ़ कमर्शियल ऑफ़िसर जोआना मर्सर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “फिलहाल हमारा ध्यान इस बात पर है कि भारत में जल्द से जल्द कोरोना के मरीज़ों के लिए ये दवा उपलब्ध कराई जा सके । इसके लिए हम सरकार, स्वास्थ्य अधिकारियों और वालंटरी लाइसेंस धारकों से बातचीत कर रहे हैं ।”
कोरोना के कहर को देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने भी भारत को आपातकालीन मदद भेजी है ।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए आंकड़ों के अनुसार भारत में संक्रमितों की कुल संख्या 17.31 करोड़ हो चुकी है और मरने वालों की संख्या 195,123 हो चुकी है ।
हालांकि जानकारों का कहना है संक्रमितों और मरने वालों का आंकड़ा आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकता है ।
रेमडेसिविर का उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें
रेमडेसिविर एक जेनेरिक एंटीवायरल दवा है । ये लाइसेंस्ड ड्रग है जिसका पेटेंट अमेरिका की गिलिएड कंपनी के पास है ।
गिलिएड ने भारत की कुछ कंपनियों को ये दवा बनाने का लाइसेंस दिया है । इनमें डॉक्टर रेडीज़ लेबोरेटरीज़, ज़ायडस कैडिला, सिप्ला, हेटेरो लैब्स, जुबिलिएंट लाइफ़सांइन्सेस और मायलान जैसी कंपनियाँ शामिल हैं ।
इसका मतलब ये है कि ये कंपनियाँ भी रेमडेसिविर बना सकती हैं और बाज़ार में बेच सकती हैं ।
बीते सप्ताह रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा था कि कोरोना के कारण बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार रेमडेसिविर का उत्पादन 3 लाख शीशियां प्रति दिन करने की कोशिश कर रही है ।
उन्होंने कहा था कि अप्रैल 12 तारीख तक रेमडेसिविर के उत्पादन के लिए 25 नए मैनुफैक्चरिंग प्लांट को इजाज़त दी गई है जिसके बाद इसका उत्पादन 40 लाख शीशी प्रति महीने से बढ़ा कर 90 लाख शीशी प्रति महीने किया गया है ।
Very soon, 3 lakh vial/day will be produced . Monitoring is being done on daily basis. We would not leave any stone unturned to supply #Remdesivir. (2/2)
— Dr Mansukh Mandaviya (मोदी का परिवार) (@mansukhmandviya) April 23, 2021
