कानपुर । आजादी के 75 वर्ष के अमृत महोत्सव की पावन बेला में आज रक्षा अध्ययन विभाग,डीएवी कॉलेज कानपुर के सभागार में आई.सी.डब्ल्यू.ए. नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शीर्षक “भारतीय विदेश नीति के 75 वर्ष उपलब्धियां एवं संभावनाएं” का उद्घाटन प्रातः 10:00 बजे से प्रारंभ हुआ ।

उद्घाटन सत्र में श्रीमती नीलिमा कटियार,वर्तमान विधायक एवं पूर्व राज्य उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर मंच को सुशोभित किया ।
इसके अतिरिक्त डीएवी कॉलेज कानपुर के प्रबंधतंत्र की सचिव कुम कुम स्वरुप, महाविद्यालय के ऊर्जावान प्राचार्य प्रो0 अरुण कुमार दीक्षित,कीनोट स्पीकर के रूप में उपस्थित भारत सरकार के राजदूत श्री जे.के. त्रिपाठी,विशिष्ट अतिथि के रूप में राजदूत अचल कुमार मल्होत्रा,राजदूत अनिल कुमार त्रिगुणायत एवं उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद के वाइस चेयरमैन डॉ. मुकुल चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त मेजर जनरल श्री अशोक कुमार जी ने मंच को भव्यता प्रदान की ।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा सरस्वती जी के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया ।
सरस्वती वंदना की प्रस्तुति डॉ० श्रुति श्रीवास्तव द्वारा की गई ।
तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत उदबोधन प्रोफेसर अरुण कुमार दीक्षित प्राचार्य डीएवी कॉलेज द्वारा किया गया ।
इस क्रम में संगोष्ठी से संबंधित संपादित पुस्तक “75 years of India’s Foreign Policy : Achievements and Possibilities” का विमोचन किया गया ।
आयोजक सचिव प्रोफेसर संध्या सिंह द्वारा इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का कॉन्सेप्ट नोट पढ़ा गया । कीनोट ऐड्रेस राजदूत जेके त्रिपाठी द्वारा दिया गया । त्रिपाठी ने अपनी लंबी सेवा के अनुभव के आधार पर बताया कि 2014 के बाद भारत की विदेश नीति में अमूल चूल परिवर्तन किए गए । उसी का परिणाम है कि आज सम्पूर्ण विश्व का भारत के प्रति नजरिया बदल चुका है । अब हम बिना किसी दबाव के सर्जिकल स्ट्राइक जैसे निर्णय लेने और उन्हें कार्यान्वित करने में तनिक भी नहीं घबराते । हरित क्रांति के कारण आज हम इतने सक्षम हो चुके हैं कि दुनिया के बारह देशों को अनाज का निर्यात करते हैं । रक्षा क्षेत्र मे भी हम तीव्र गति से आगे बढ़ रहे हैं । उन्होंने प्रतिभागियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही भारत दुनिया की महाशक्तियों में शुमार किया जाएगा ।
इसके उपरान्त मुख्य अतिथि श्रीमती नीलिमा कटियार ने हमारे महा विद्यालय को पूरब का मानचेस्टर कहकर संबोधित किया और देश के प्रधानमंत्री मोदी के विजन और उनके नेतृत्व में हमारा देश एक विकसित देश की भांति वैश्विक पटल पर अपनी सशक्त भूमिका निभा रहा है ।
उन्होंने उपस्थित अतिथियों का मनोबल बढ़ाया और संगोष्ठी की सफलता की हार्दिक शुभकामनाएं दीं ।
सचिव श्रीमती कुमकुम स्वरुप ने अपने उद्बोधन में बताया कि य़ह महाविद्यालय 2019 में अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण कर चुका है ।
उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने वाले अनेकों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों की कर्मस्थली रहा है । इस कॉलेज को अपने शिखर तक ले जाने में यश शेष स्व० नागेंद्र स्वरुप जी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता ।
इसके पश्चात महाविद्यालय के यशस्वी और ऊर्जावान प्राचार्य प्रोफेसर अरुण कुमार दीक्षित ने आए हुए सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया । उन्होंने बताया कि ये उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित महाविद्यालय रहा है ।
भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री स्व० अटल बिहारी वाजपेयी ज और पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविद जी यहीं के विद्यार्थी रहे हैं ।
उन्होंने सचिव को अपने भावुक शब्दों मे कृतज्ञता ज्ञापित की । अपने महाविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा दिए जाने वाले सहयोग की उन्होंने भूरि भूरि प्रशंसा की और आयोजन की सफ़लता का श्रेय अपने सहयोगियों को दिया ।
इस अवसर पर कई महाविद्यालयों के प्राचार्य,प्रोफेसर विवेक द्विवेदी जी,प्रोफेसर अनिल मिश्रा जी,महा विद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ० आर० बी० तिवारी जी व कई अन्य विद्वान शिक्षकगण उपस्थित रहे ।
