बिन्दकी/फतेहपुर । विप्र,धेनु,देवता व संत यह सभी सनातन धर्म के मूल आधार हैं । यह बात खजुहा ब्लाक क्षेत्र के टिकरी गांव में चल रहे ।
श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन ज्ञान की गंगा बहाते हुए रोशनी शास्त्री ने कहा ।
उन्होंने कहा विप्र के बिना धर्म के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान एवं प्रतिपादन तथा आचरण संभव नहीं है । यज्ञ आदि की धार्मिक क्रियाएं संपन्न नहीं हो सकती । देवताओं की कृपा के अभाव में अच्छे कर्मों का फल उचित प्रकार से नहीं मिल सकता है तथा प्राणी के गुणों का विकास भी नहीं हो सकता है । संत सज्जन वास्तविक माननीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं और भगवान इन्हीं चार के परीक्षण के लिए अवतार धारण करते हैं ।
उन्होंने कहा कि दुखी व्यक्ति की सेवा करना मनुष्य जाति का सबसे बड़ा धर्म है और इस धर्म से ही जीवन का उद्धार होता है । अतः सभी प्राणियों को ऐसा कोई कारण नहीं करना चाहिए जिससे दूसरे का मन दुखी हो जाए ।
मनुष्य को सदैव ऐसे कार्य करना चाहिए कि दुखी आदमी में भी प्रसन्नता का भाव दिखाई दे यही अच्छे कर्म है और वास्तविक धर्म है । श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे ।
