बिन्दकी/फतेहपुर । स्वास्थ्य विभाग और नेशनल हेल्थ मिशन उत्तर प्रदेश के सहयोग से,प्रोग्रेसिव फाउंडेशन लखनऊ द्वारा जिले में चलाए जा रहे एंजिया (एनजेआईए) कार्यक्रम के अंतर्गत आज नुक्कड़ नाटक प्रस्तुति के द्वारा सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) के प्रति लोगों को शिक्षित और जागरूक किया गया ।


यह प्रस्तुति सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र बिंदकी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालगंज में की गई ।
एन0सी0डी0 नोडल डाक्टर राजेंद्र कुमार ने सर्वाइकल कैंसर की गंभीरता के बारे में बताते हुए अवगत कराया कि जिलें में शीघ्र ही पूर्व सर्वाइकल कैंसर जांच की सुविधा सभी स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में की जाएगी । इस क्रम में जिले के डॉक्टरों को इस जांच को करने के लिए प्रशिक्षित करने का काम शुरू कर दिया गया है । डॉक्टर कुमार ने सभी लोगों से आग्रह किया कि पहले वो खुद इस बीमारी के बारे में जानें और अपने साथ अन्य लोगों को शिक्षित और जारगुक करें ।
प्रोग्रेसिव फाउंडेशन की प्रोग्राम मैनेजर,प्रिंसी प्रजापति ने बताया कि एंजिया (NJIA) कार्यक्रम को यू के की संस्था पीपल फाउंडेशन के द्वारा डिजाइन किया गया है । जो रोश फर्मास्यू टिकल द्वारा वित्त पोषित है और यह कार्यक्रम भारत के अलावा अफ्रीकी देश तंजानिया और यूगांडा में भी चलाया जा रहा है । पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (पीएस आई) और जपाइगो जैसी अंतराष्ट्रीय संस्थाएं भी इस कार्यक्रम में भागीदार हैं ।
एंजिया (NJIA) कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय नेतृत्व विकास के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर से संबंधित सभी सुविधाओं को आम जनता के लिए मुहैया कराना है । ताकि इस बीमारी के प्रति जागरुकता को बढ़ाया जा सके और प्रारंभिक जांच कर इस बात का पता लगाया जा सके कि बच्चेदानी के मुंह (सर्विक्स) में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस का संक्रमण है या नहीं। अगर संक्रमण है तो समय से कैंसर बनने से पूर्व ही इलाज किया जा सके और यदि जरूरत हो तो उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर आगे की जांच और इलाज के लिए संदर्भित किया जा सके ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा भी यह प्रस्तावित है कि 30 से 60 साल की महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए अपनी कैंसर पूर्व जांच करवानी चाहिए और 9 से 14 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियों को इससे बचाव के लिए एचपीवी के दो टीके छह-छह माह के अंतराल पर जरूर लगवाना चाहिए । भारत सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु के मामलों में विश्व में दूसरे नंबर पर है । किंतु समय से जांच और टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी का बचाव पूर्णतया संभव है ।
