रवीन्द्र त्रिपाठी की खास रिपोर्ट
फतेहपुर । भाजपा नेताओं की अंदरुनी कलह धीरे धीरे बेपर्दा होती जा रही है । अगर ऐसी ही पार्टी के अंदर रार रही तो निकाय चुनाव के बाद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में नगर निकाय जैसी हार फिर दोहराएंगे । जनपद भाजपा नेताओं में अगर मनभेद व मतभेद नहीं मिटे तो लोक सभा चुनाव में इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है ।
गुटबाजी का ही नतीजा रहा कि जिन आपेक्षित परिणामों की भाजपा निकाय चुनाव में उम्मीद लगा बैठी थी वह नहीं आए । एक बार फिर नेताओं की आपसी कलह अंदर खाने खिचड़ी पका रही है । धीरे-2 हालात यह होते जा रहे हैं कि अंतर्द्वंद की लड़ाई संघर्ष की ओर बढ़ती नजर आ रही है ।
खबर है कि दो कद्दावर नेताओं की गत दिनों एक गोपनीय स्थान में हुई बैठक के बाद रणनीति की हवा छन कर जिस तक पहुंच रही है उसके होश उड़ रहे हैं सार्वजनिक कार्यक्रमों में पार्टी के ही एक नेता के बड़े विरोध प्रदर्शन की पृष्ठ भूमि तैयार की गई है । इसके लिए गैर जनपद से अराजक तत्वों को बुलाए जाने की बात कही गई । गुप्त बैठक थी जरूर लेकिन कद्दावरों सहित कुछ अन्य सिपहसलारों की मौजूदगी में बनी रणनीति को उसी बैठक में मौजूद कुछ लोग पचा नहीं पाए और रणनीति को बाहर निकाल दिया किराए के अराजक तत्वों को बुलाकर रास्ते के कांटे को हटाने की हुई चर्चा अन्य नेताओं तक पहुंची तो वे स्तब्ध रह गए ।
मामला शासन के उच्चाधिकारियों,संगठन के बड़े नेताओं तक पहुंच गया है । संबंधित नेता को भी इसकी खबर लग चुकी है बैठक में मौजूद कुछ लोग सफाई दे रहे हैं तो कुछ मौके पर ही बिरोध करने की बात कर रहे हैं । स्थानीय खुफिया तंत्र एवं इंटेलिजेंस को भी इस संघर्ष की हवा लग चुकी है ।जिसकी आशंका को लेकर तंत्र सतर्क हुआ है । हाल ही में हुई बैठक में मौजूद कद्दावरों के विश्वास पात्र ही गोपनीय बैठक को गुप्त नहीं रख पाए ।
नेताओं की गुटबाजी का लोकसभा चुनाव में बड़ा असर दिखने वाला है लाख प्रयासों के बावजूद भी बनी खाईं को भारतीय जनता पार्टी के नेता पाट नहीं पा रहे हैं ।
नीति,सिद्धांत,चाल,चरित्र से भटके कुछ नेता और ही कहानी लिखने को बेताब दिख रहे है जिस तरह से जिले में हालात बन रहें हैं । उससे यह कहना गलत न होगा कि लोकसभा चुनाव की राह भारतीय जनता पार्टी के लिए कांटो भरी होने वाली है ।
