वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र त्रिपाठी की खास रिपोर्ट
फतेहपुर । कवि व्यंग्यकार ऐक्टर शैल चतुर्वेदी की रचना आज के परिवेश में टमाटर 🍅 को लेकर लिखे गए व्यंग में विल्कुल सटीक लग रही है अपनी व्यंग रचना में शैल चतुर्वेदी ने लिखा था । एक दिन बच्चा अपनी मम्मा से पूछेगा मम्मा-मम्मा टमाटर 🍅 कैसा होता है तो मम्मा फोटो दिखाकर बोलेगी बेटा टमाटर 🍅 ऐसा होता है । आज शैल चतुर्वेदी का व्यंग टमाटर 🍅 की मंहगाई पर अपनी मुहर लगा रहा है । टमाटर मंहगाई किसानों की बवालेजान बन गई है । टमाटर की मंहगाई ने जहां सब्जियों का जायका खराब कर दिया है । वहीं रुपए पैसों की जगह चोरों के निशाने पर आ गया है । आज कल समाचार पत्रों व सोशल मीडिया की सुर्खियों में टमाटर 🍅 चोरी की घटनाओं व टमाटर को लेकर किसानों की हत्या ने स्थान ले लिया । टमाटर 🍅 को लेकर हर जगह हाय तौबा मचा हुआ है । विपक्षी दल टमाटर 🍅 को लेकर सत्ता पक्ष के खिलाफ आंदोलन में उतर आए हैं । सत्ता पक्ष की टमाटर 🍅 को लेकर मुखालिफत करने वालों को शायद यह नहीं मालूम कि इससे किसानों की आय में कितनी वृद्धि हो गई है सरकार ने यही तो वादा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दो गुनी हो जाएगी । जब टमाटर 🍅 से किसानों की आय चार गुना से ज्यादा हो गई है तो फिर क्यों हाय तौबा ?
देश की प्रगति की निशानी मंहगाई ही तो है । मंहगाई बढी है तो लोगों की आय बढ़ी है । टमाटर 🍅 क्या इसका उदाहरण नहीं है । पहले हम पैदल व बैलगाड़ियों से चलते थे । मोटर गाड़ियों में बैठने के लिए पैसा नहीं था आज हवाई जहाज में सवारी कर रहा है । पहले रोटी के लाले थे अब पिज्जा जैसे लजीज फास्ट फूड हर बड़े छोटे मझोले लोगो तक आसानी से पहुंच रहा है । पहले लोगों को सायकिल मुहैया नहीं थी आज हर आंगन व हर व्यक्ति के पास मोटर साइकिल व कार है ।अगर हमारा देश तरक्की न कर रहा होता तो यह सब कैसे सम्भव होता ?
प्रगति की ही निशानी है कि आज 100 रुपए लीटर पेट्रोल लेने में दिक्कत नहीं है 1150 में गैंस सिलेंडर लेने में दिक्कत नहीं है तो टमाटर 🍅 को लेकर इतनी हाय तौबा । मंहगाई ही तो हमारी प्रगति की निशानी है । मंहगाई ही हमें प्रगति का रास्ता दिखाती है और हम अधिक कमाई के लिए प्रेरित होते हैं ।
