– जिम्मेदारों के आंख-कान बंद, ग्रामीण परेशान

बकेवर/फतेहपुर । विकास खण्ड देवमई के अंतर्गत करनपुर (गोपालपुर) गाँव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है । यहाँ निवासियों का आरोप है कि गांव में तैनात सफाईकर्मी काम में रुचि नहीं ले रहा हैं । ऐसे में गांव में गंदगी का अंबार लगा हुआ है । करनपुर गाँव में दम तोड़ रहे स्वच्छ भारत मिशन अभियान के कारण अब ग्रामीणों को संक्रामक रोगों का खतरा भी सताने लगा है । नालियां चोक होने के कारण बरसात का पानी गांव की गलियों में ही बहता है ।जिससे हर तरफ कीचड़ ही कीचड़ है । जिसकी बदबू से लोग बेहाल है व रास्ता बदलने पर मजबूर है ।
गाँव के कालीदीन पाल, अवधेश तिवारी, महावीर पाल, रमेश विश्वकर्मा,दीपक आदि लोगो ने बताया कि सफाईकर्मी पंद्रह-पंद्रह दिनों में आता है । गंदगी के विषय मे ग्राम प्रधान से भी कई बार कहा गया है । लेकिन कोई ध्यान नही देता है । जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण गंदगी का अंबार लगा है । इसका खामियाजा ग्रामीणों को ही भुगतना पड़ रहा है । गांव में नियमित सफाई नहीं कराए जाने से जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं और नाले-नालियां जाम होने से गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है इस गंदगी से गाँव में बीमारी का संक्रमण बढ़ता जा रहा है और दुर्गंध से लोग परेशान हैं । बरसात के मौसम में स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है । क्योंकि कचरे में पानी भर जाने से दुर्गंध आती रहती है लंबे समय से सफाई नहीं कराए जाने के कारण नाले-नालियों की कचरे से पटे हुए है । नालियों में इतना कचरा भरा है कि पानी की निकासी नहीं हो पाती है और घरों का गंदा पानी रोड के ऊपर होकर बहता रहता है । ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरीवश हम लोगो को ही नालियों की सफाई करनी पड़ती है ।
इस विषय मे सहायक विकास खण्ड अधिकारी पंचायत राज कुमार पटेल का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है ।जांच कर कार्रवाई की जाएगी ।
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करनपुर का प्राथमिक विद्यालय भी बदहाल

गांव में बने प्राथमिक विद्यालय स्थिति भी दयनीय है । जहां बाउंड्री वॉल न होने के कारण ग्रामीणों ने अपने ट्रैक्टर, ट्रॉली व हल इत्यादि को विद्यालय परिसर में ही खड़ा कर देते है । दिन के समय आवारा जानवर व रात के समय अराजकतत्वों का बसेरा रहता है । विद्यालय के बाहर लोगो ने घूर डाल रखा है । जिससे चारो तरफ गंदगी ही गंदगी नज़र आती है । उसी गंदगी को पारकर नन्हे-मुंन्हे बच्चें विद्यालय जाने को मजबूर होते है । बरसात में तो हालत बद से बदतर हो जाती है ।
