वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र त्रिपाठी की खास रिपोर्ट
फतेहपुर । किसी भी हाल में भाजपा का किला ढहाने के लिए INDIA मुस्तैदी के साथ रणनीति बना रहा है । किसी भी हालत में साध्वी को हैट्रिक लगाने से रोकने की कवायद शुरू हो गई है । लोकसभा चुनाव के फुंके बिगुल के बाद भारतीय जनता पार्टी ने दो बार की सांसद केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को हैट्रिक लगाने के लिए फिर से चुनाव मैदान में उतारा है । वहीं विपक्षी प्रत्याशियों की अभी घोषणा नहीं हुई है । सपा-कांग्रेस के हुए गठबंधन के बाद भाजपा प्रत्याशी की जीत रोकने के लिए समाजवादी पार्टी बड़ा मंथन कर रही है । नतीजतन प्रत्याशी की घोषणा में देरी है । पीडीए के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की वकालत करने वाली समाजवादी पार्टी फतेहपुर लोकसभा में बड़ा दांव खेलना चाह रही है और यहां के करीब 6 लाख सवर्ण मतदाताओं को रिझाने की जुगत में है । पार्टी के अंदर खाने जो खेल चल रहा है । उसमें किसी मजबूत ब्राह्मण या क्षत्रिय चेहरे को चुनाव मैदान में उतारकर मुस्लिम,यादव एवं पिछड़े मतदाताओं को अपने पाले में लाकर साध्वी की जीत में ब्रेकर लगाने का ताना-बाना बुनने में लगी है । सफलता कितनी मिलती है यह तो समय बताएगा लेकिन सपा के रणनीतिकार यहां बड़ा खेल करने को लेकर मजबूत किलाबंदी करने में लगे हैं ।
29 लाख से अधिक आबादी वाला फतेहपुर जिला राजनीतिक दृष्टि कोण से चारागाह जैसा ही रहा है । यहां कांग्रेस,बसपा,सपा,भाजपा जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों ने जिले के लोगों से अधिक बाहरियों पर दांव लगाया और यहां के मतदाताओं ने उन्हें हाथों हाथ लिया ।एक बार फिर 18वीं लोकसभा का होने वाला चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद है । जिले के 1931895 मतदाता अपने नए संसद का चुनाव करेंगे । भारतीय जनता पार्टी ने दो बार की सांसद साध्वी निरंजन ज्योति को फिर से टिकट देकर विपक्षी दलों के सामने बड़ी चुनौती दी है । केंद्र व प्रदेश सरकार के विकास कार्यों एवं जन कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जीत को लेकर आस्वस्थ भाजपा को घेरने के लिए विपक्षियों की गणित भी शुरू है ।
हलांकि बहुजन समाज पार्टी अभी साइलेंट मोड़ में है । सपा कांग्रेस के हुए गठबंधन के बाद समाजवादी पार्टी के खाते में गई यहां की सीट पर अभी प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है । भाजपा प्रत्याशी के सामने मजबूत प्रत्याशी उतारने की गणित नेतृत्व लगा रहा है ।
सपा में प्रत्याशियों की घोषणा की उठा पटक के बीच यहां कभी समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व जिले की मिट्टी से ताल्लुक रखने वाले नरेश उत्तम पटेल तो कभी पल्लवी पटेल तो कभी दो बार के सांसद रहे डॉक्टर अशोक पटेल का नाम हवा में तैरता है ।नरेश उत्तम के नाम को करीब करीब फाइनल माना जा रहा था ।लेकिन इसी बीच सपा नेतृत्व के हुए मंथन के बाद सवर्ण मतदाताओं को रिझाने के लिए मजबूत सवर्ण प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने का मंथन शुरू है । उम्मीद है कि आगामी दिनों में प्रत्याशी की घोषणा हो जाएगी लेकिन इस बीच समाजवादी पार्टी ने भाजपा, बसपा के जिले से ताल्लुक रखने वाले मजबूत एवं चर्चित क्षत्रिय व ब्राह्मण नेताओं से संपर्क साधा है । एक ओर सवर्ण मतदाताओं को रिझाने तो दूसरी ओर जिलेवाद की राजनीति को तेज हवा देने की तैयारी है ।
लखनऊ के राजनीतिक गलियारों से जो हवा चली है वह मंद-मंद यहां तक ये खबर लेकर पहुंच रही है कि समाजवादी पार्टी मजबूत क्षत्रिय चेहरे पर दांव लगाकर यहां से करीब 6 लाख सवर्णों के अलावा मुस्लिम, यादव एवं पिछड़े मतदाताओं के सहारे भाजपा प्रत्याशी की जीत के रथ को रोकने की मंशा रखती है । मंथन में यह भी चल रहा है कि जिले के ही कुर्मी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारकर पिछड़े मतदाताओं को एकजुट कर मुस्लिम, यादव के मजबूत समीकरण यानी पीडीए के जरिए सपा अपनी चुनावी नैया पार लगाए । समाजवादी पार्टी सवर्ण मतदाताओं को रिझाना भी चाह रही है तो 2022 के विधानसभा चुनाव में हुसैनगंज एवं सदर विधानसभा सीट के साथ-साथ नगरपालिका परिषद फतेहपुर की सीट में पिछड़े मतदाताओं की एकजुटता के परिणाम से आशंकित भी है । लेकिन फतेहपुर लोकसभा के अलावा आस-पास के जनपदों में भी एक संदेश छोड़ने की बड़ी कवायद करने में समाजवादी पार्टी लगी है कि सपा केवल पीडीए ही नहीं बल्कि सवर्णों की भी हितुआ है । जीत को लेकर सपा कोई भी दांव लगा सकती है । अब देखना यह है कि प्रत्याशी किसे उतारती है । लेकिन कशमकश के बीच यहां हर उस किले की मोर्चेबंदी को मजबूत कर भाजपा के विजय रथ को रोकने का मंसूबा समाजवादी पार्टी पाले है ।
