कानपुर । कानपुर शहर से करीब 50 किलोमीटर नरवल तहसील के थरेपाह गांव में सिद्ध मां काली का सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर स्थापित है । नवरात्र के पावन पर्व माता के दर्शन के लिए आस पास गांव सहित दूर-दूर से देवी भक्त मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना करते है । श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर बेहद खास है । ऐसी मान्यता है अगर सच्चे मन से कोई सिद्ध मां काली मंदिर में दर्शन और पूजा करने पहुंचता है तो उसके सारे दुख दर्द दूर जाते है । मां काली मंदिर गांव की कुल देवी है ।
गांव निवासी देवी भक्त शालिनी सिंह पूर्व प्रधान बताती हैं कि सिद्ध मां काली मंदिर करीब दो सौ वर्ष पुराना बताया जाता है । मां काली जी की मूर्ति कब स्थापित की गई,यह बता पाना मुश्किल है । गांव के बुजुर्गों के मुताबिक कहा जाता है कि मंदिर के स्थान बहुत घना जंगल हुआ करता था । जंगल में काले सांप इधर-उधर घूमा करते थे । बताया जाता है कि एक दिन गांव के लोग मिट्टी खोदने के लिए इसी जंगल में आए थे । मां काली मूर्ति खुदाई के दौरान मिली थी । ग्रामीणों ने मिलकर जहां मूर्ति मिली थी । उसी स्थान पर मिट्टी की मठिया बनाकर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर मूर्ति स्थापित कर दिया । जंगल में काले सांप अधिक होने के कारण लोग मंदिर में जाने के लिए डरते थे । लेकिन बुजुर्ग बताते है जब देवी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए जाते थे तो लोगों की आहट सुनकर सांप अपनी अपनी मठियों में छिप जाया करते थे । सांपों ने कभी किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचाया । मां काली मंदिर के अलावा दुर्गा माता व भगवान शंकर का मंदिर स्थापित है । मंदिर के पास सैकड़ों वर्ष पुराना पीपल का पेड़ है । जिसमें अभी भी नाग-नागिन रहते है । यह जोड़ा ग्रामीणों को आते जाते कई बार दिखाई दिया है । लेकिन कभी भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है ।
श्रद्धालु पप्पू सिंह,अमरजीत सिंह उर्फ शालू,किशन पाल सिंह,अमित सिंह ने बताया कि मां काली जी मूर्ति खुदाई के दौरान मिली थी । जिसे ग्रामीणों द्वारा इसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया था । तब से आज तक मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा है । दूर-दूर से देवी भक्त नरवल के थरेपाह स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल सिद्ध मां काली मंदिर में दर्शन के लिए आते है । माता के दर्शन करने से भक्तों के सारे दुख दर्द दूर हो जाते है । इसलिए ग्रामीणों द्वारा शक्ति पीठ की उपाधि दी गई है । मां काली मंदिर ग्राम की कुलदेवी है । गांव के लोग मुंडन-छेदन आदि कार्यक्रम आयोजित करते है ।
