फतेहपुर । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष ने जिला अधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौपा । ज्ञापन प्रदेश के शिक्षक अपनी माँगों यथा पुरानी पेंशन की बहाली, वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन,तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण,निःशुल्क चिकित्सा सुविधा आदि को लेकर विगत कई वर्षों से आन्दोलित हैं । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के तत्वाधान में अपनी माँगों के समर्थन में अनेक बार धरना, प्रदर्शन के साथ-साथ ज्ञापन के माध्यम से अपनी माँगें आपको प्रेषित कर चुके हैं । किन्तु प्रदेश सरकार की ओर से माँगों के निराकरण के सम्बन्ध में कोई संज्ञान अथवा कार्यवाही न किये जान से प्रदेश का शिक्षक समुदाय अत्यन्त क्षुब्ध एवं आहत् है । 25 जुलाई 2024 को जनपद के शिक्षक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के समक्ष शान्तिपूर्ण धरना देकर अपनी माँगे रखी थी । जिसे आज दोहराते हुए यह ज्ञापन प्रेषित किया हैं ।
माँग-पत्र संलग्न करते हुए अनुरोध किया है कि माँग का निस्तारण कर प्रभावी कार्यवाही करें । संलग्नक-23 सूत्रीय माँग-पत्र, कमल सिंह चौहान अतुल सिंह यादव प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आलोक शुक्ला अध्यक्ष बलराम कोषाध्यक्ष आय-व्यय निरीक्षक अमित कुमार सिंह जिला मंत्री महेन्द्र पाल सिंह राठौर, संतोष अग्निहोत्री, मानु प्रताप सिंह, धनराज सिंह, वीरेन्द्र नारायण सिंह, गौरीनाथ शुक्ला, त्रिलोकीनाथ मिश्र, जय प्रकाश नारायण योगेन्द्र कुमार, अजय कुमार, सुशील यादव, अनुज त्रिवेदी, अमित वर्मा, नरेन्द्र कछवाह, अर्षित शर्मा, रामबरन,कमाल अहमद सिद्दीकी, मो० फारुक्, प्रियंका द्विवेदी, शालिनी सिंह, कौसर जहाँ रुचि पाल मासूक खान, महेन्द्र पाल सहित सैकडों शिक्षक उपस्थित रहीं ।
शिक्षक समुदाय का निश्चित मत है कि एनपीएस अर्थात नई पेंशन योजना शिक्षक की वृद्धावस्था में उसी जीवनस्तर के साथ जीवयापन करने योग्य नहीं है । जिस जीवन स्तर पर शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहा है । पुरानी पेंशन ही वृद्धावस्था का समुचित जीवन स्तर बनाये रखने का माध्यम है । वही पुरानी पेंशन सरकार बहाल करे । वित्त विहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतनमान के सिद्धान्त पर वेतन एवं सेवा शर्ते लागू की जाएं ।
चयन बोर्ड अधिनियम की धारा-12, 18 व 21 की व्यवस्थाओं का यथावत् अधिनियमित रूप में माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में समाहित किया जाए साथ ही विद्यालय व छात्रहित में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग 2023 विधेयक की धारा 11 (6) को विलुप्त किया जाए ।
राजकीय शिक्षकों की भाँति सहायिक माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी निःशुल्क चिकित्सा सुविधा अनुमन्य की जाए । सातवाँ वेतन आयेग दिनांक 01 जनवरी 2016 से प्रभावी था । आठवाँ वेतन आयोग 01 जनवरी 2026 से देय होता है । अतः ४वाँ वेतन आयोग गठन किया जाए । एन०पी०एस० से आच्छादित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह 10 प्रतिशत की कटौती तो कर ली जाती है,किन्तु 14 प्रतिशत राज्यांश का अंशदान समय से न मिल पाने के कारण उक्त सकल धनराशि एन०एस०डी०एल० को प्रेषित नहीं हो पाती है । जिससे कि शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय हानि उठानी पड़ती है एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत्तक लाभ भी नहीं प्राप्त हो पाता है ।
अतः राज्यांश का अंशदान भी प्रतिमाह समय से उपलब्ध कराया जाए । ऐसे शिक्षक जो 22 मार्च 2016 की अधिनियमित व्यवस्था के अन्तर्गत विनियमित हुए है । उन्ही नियुक्ति के दिनांक से पुरानी पेंशन अनुमन्य की जाए । क्योंकि इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई प्रकरणों पर पूर्व की सेवा जोड़ कर पेंशन स्वीकृत करने का निर्देश जारी किया है ।
प्रदेश के शासकीय सहायत प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2000, 2001 तथा 2002 के विज्ञापन के आधार पर जिन शिक्षकों की विषय विशेषज्ञ के रूप में नियुक्ति की गयी तथा जिन शिक्षक पदों पर आमेलन अधिसूचना संख्या-1521-79-वि-01 क)-42 दिनांक 11 दिसम्बर 2006 द्वारा कर दिया गया है । इससे सभी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को शासन की अधिसूचना 28 जून 2024 के शासनादेश के अनुसार पुरानी पेंशन से आच्छादित किया जाए ।
बोर्ड परीक्षाओं की पारिश्रमिक दरें सी०बी०एस०सी० के समान की जाए तथा परीक्षाओं एवं मूल्यांकन आदि से सम्बन्धित अवशेषों का भुगतान तत्काल किया जाए ।
अवशेष वेतन,मँहगाई भत्ता,चयन,प्रोन्नत,पदोन्नति आदि से सम्बन्धित अवशेषों का भुगतान शीध किया जाए । विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक शिक्षकों को भी पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा देते हुए उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन सिद्धान्त के आधार पर वेतन अनुमन्य किया जाए । विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षक का पद सृजित करते हुए उस पर तत्काल नियुक्ति की जाए शिक्षकों के स्थानान्तरण नीति में आवश्यक संशोधन कर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि शिक्षक अपनी सुविधानुरूप स्थान पर स्थानान्तरण प्राप्त कर सके।वर्ष 2014 से बन्द सामूहिक बीमा को पुन प्रारम्भ किया जाए ।
01 अप्रैल से 30 सितम्बर तक की अवधि में विद्यालय का शिक्षण कार्य अवधि मानवीय आधार पर पूर्व की भाँति 04 घण्टे 35 मिनट पुनः निर्धारित किया जाए । ग्रीष्मावकाश अवधि में यथासंभव शिक्षक तथा छात्र/छात्राओं के लिए सरकार अथवा विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का कोई कार्यक्रम निर्धारित किया जाए ।
अल्पसंख्यक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति की जाए । सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत महिला शिक्षकों का उत्पीड़न बन्द किया जाए । प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मबारियों का कोरोना काल में रोके गये मॅहगाई भत्ते के अवशेषों का भुगतान कराया जाए ।
माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के समायोजन किये जाने से सम्बन्धित शासनादेश संख्या-1251/15-05-2022-1600 (252) माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-05 दिनांक 07 सितम्बर 2022 को निरस्त किया जाए । राज्य कर्मचारियों की भाँति सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को भी पेंशन की गणना हेतु समान परिस्थितयों में एक नोशनल वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान किया जाए । 09 नवम्बर 2023 के शासनादेश द्वारा तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गयी हैं,ऐसे सभी तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करते हुए उनकी सेवाएं बहाल की जाए ।
वर्ष 1998 में शिक्षकों द्वारा अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में की गयी हडताल अवधि का कतिपय शिक्षकों का अवरुद्ध वेतन उनके अर्जित अवकाशों को समायोजित करते हुए भुगतान किया जाए ।
