कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा । जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक अंतर्गत पाली हाईस्कूल में पदस्थ रहने के दौरान मई 2023 से जून 2024 तक अनुपस्थित रहकर भी 14 माह का वेतन आहरण करने वाले वर्तमान विकासखण्ड स्रोत समन्वयक भरतलाल कुर्रे पूर्व में भी इस पद पर रहते हुए विवादों में रहे है । जहां बालवाणी घोटाला मामले में वे काफी चर्चित रहे ।
उल्लेखनीय है कि आंगनबाड़ी जाने वाले नौनिहालों के बौद्धिक विकास हेतु उन्हें प्राथमिक शाला में कक्षा पहली व दूसरी के बच्चों के साथ सम्मिलित कर पाठ्य सामाग्री के माध्यम से उचित शिक्षा ग्रहण कराया जाने हेतु शासन के मंशानुसार पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के 130 प्राथमिक शाला को बालवाणी योजना से जोड़ा गया था । जिसमें चयनित प्राथमिक शाला के प्रधान पाठकों के खाते में 15- 15 के हिसाब से 19 लाख 50 हजार की राशि जारी हुई थी । जिस राशि से नौनिहालों के खेल से जुड़ी पाठ्य सामाग्री खरीदी करनी थी । तब विकासखण्ड स्रोत समन्वयक की जवाबदारी सम्हाल रहे भरतलाल कुर्रे द्वारा प्रधान पाठकों के खाते में जारी राशि पर भ्रष्ट्राचार की नीयत से शासन के सारे नियम कायदे को दरकिनार करते हुए बिना प्रस्ताव व बिना कोटेशन तथा बिना निविदा के रायपुर के एक फर्म से सांठगांठ कर घटिया पाठ्य सामाग्री को चयनित शालाओं में भेज प्रधान पाठकों पर राशि आहरण के लिए दबाव बनाया जा रहा था और तब कई शिक्षकों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया था कि उनके स्कूलों में जो पाठ्य सामाग्री पहुँचाई गई है,वह बेहद ही घटिया स्तर की है तथा जिनकी अधिकतम खरीदी राशि 3 से 4 हजार रुपए की होगी । लेकिन उनसे पूरे 15 हजार आहरण कर देने दबाव बनाया जा रहा है । अनेक स्कूलों के प्रधान पाठकों ने तो उक्त सामाग्री लेने से मना भी कर दिया था तब उन्हें धमकाया भी गया था ।
मामले को लेकर तब पोड़ी उपरोड़ा बीईओ, बीआरसी द्वारा चल रहा 20 लाख का बालवाणी घोटाला :
बिना निविदा एक फर्म से सांठगांठ कर स्कूलों में खपा रहे घटिया पाठ्य सामाग्री, प्रधान पाठकों पर बना रहे दबाव शीर्षक से खबर प्रसारित किया गया था । उक्त खबर को जिला प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान में लिया और विकास खण्ड स्रोत समन्वयक भरत लाल कुर्रे को जमकर फटकार लगाई । जिसके बाद सुनियोजित तरीके से बालवाणी घोटाला की तरकीब धरी की धरी रह गई व प्रधान पाठकों ने राहत की सांस ली और तब नौनिहालों को शासन की इस योजना का सही लाभ मिल सका । वर्तमान गैर हाजिर तरीके से 14 माह का वेतन लेने के मामले में जांच उपरांत शिकायत सही पाए जाने के बाद कार्यवाही के बजाय उन्हें विकासखण्ड स्रोत समन्वयक बना दिया जाना समझ से परे है । जिससे शिक्षा विभाग के कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग गया है ।
