फतेहपुर । थाना राधा नगर तहसील निवासी ग्राम फुलवा मऊ के ग्रामीणों ने आज जिलाधिकारी को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया की पीड़ित का 40 वर्षों से संपत कुमार व माधुरी पत्नी राम प्रकाश से विवादित भूमि के संबंध में मुकदमा विचार अधीन है ।
जो उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अंतिम बहस हेतु नियत पीड़ित के बाबा स्वर्गीय बद्री प्रसाद अवस्थी व पिता जो कि विवादित भूमि के वास्तविक मालिक व स्वामी थे तथा उन्होंने अपने जीवन काल में जरिया पंजीकृत वसीयतनामा अपने चार पुत्रों को भूमि दिया था तथा राम अवतार व संपत कुमार पुत्र मदन गोपाल जो के अपने ससुराल शाह में रहने लगे थे तथा ससुराल में ही भूमि प्राप्त किया था ।
इस कारण पीड़ितगण के बाबा व पिता ने राम अवतार व मदन गोपाल को कोई भी भूमि ग्राम फुलवा मऊ में नहीं दिया । संपत कुमार ने धोखाधड़ी करके भूमि अपने नाम दर्ज करवा करके ग्राम के साधना सिंह व नीलम सिंह हीरा देवी पूजा सिंह सरोज व रामलाल आदि को भूमि भूमिका विक्रय सजेशन कर दिया । जबकि विवादित भूमि पर संपत कुमार आदि का कभी कोई कब्जा व दखल नहीं रहा । कल 1 दिसंबर 2024 को रात को लगभग 12:00 बजे बैनामा दारो के संरक्षकों ने पीड़ित गण की जुताई बुवाई फसल को जबरन नष्ट कर दिया जबकि संपत कुमार आदि मात्र 16 बाई के दावेदार थे और ग्राम के कृष्ण पाल परिहार पुत्र स्वर्गीय राम कुमार सिंह सत्येंद्र परिहार पुत्र कृष्ण पाल अभिषेक पुत्र कृष्ण पाल राम कृपाल पुत्र राम सिंह जय कुंवर सिंह पुत्र राम लखन शिव चरण सिंह पुत्र शिवबरन सिंह जोकि दबंग व आपराधिक किस्म के व्यक्ति हैं । वह पीड़ित गण को आए दिन गाली गलौज वी जान से मारने की धमकी देते रहते हैं ।
उपरोक्त लोगों ने एक संयोजित योजना व षड्यंत्र के स्तर पर पीड़ित गण की संपूर्ण भूमि में बोई फसल गेहूं एवं लाहा कीमत 10 लख रुपए को ट्रैक्टर चलवा कर नष्ट करके आपराधिक कार्य किया है । जबकि उपयुक्त लोगों का नाम खतौनी में बैनामा के आधार पर आज तक दर्ज नहीं हुआ है तथा उनका नामांकन वाद आज भी विवादित है तथा तहसील नाथ तहसीलदार के न्यायालय में विचाराधीन है ।
उपयुक्त लोगों के अवैध आपराधिक कार्य से पीड़ित गानों की बड़ी मात्रा में अधिक क्षतिकारित हुई है । मामले की संपूर्ण जांच करवा कर के दोषी जनों को प्रति सुसंगत धाराओं में वाद पंजीकृत किया जाए । इस मामले की संपूर्ण जांच करवा करके दोषी व्यक्तियों के प्रति सतसंगत आपराधिक धाराओं में वाद पंजीकृत किया जाए तथा पीड़ित गण की भूमि फिर दर्ज किया जाए तथा पीड़ित को 10 लाख रुपए का हरजाना खर्च के रूप में दिलवाया जाए ।
