बिन्दकी/फतेहपुर । हमारे संवाददाता द्वारा जब अधिवक्ता राजेंद्र मिश्रा के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बहुत ही सरल स्वभाव में अपना जीवन संवाददाता के सामने रखा । ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि वह एक अधिवक्ता की भांति जवाब दे रहे ऐसा लग रहा था । जैसे वह समाज के सेवक है । उनके अंदर जो सेवाभाव नजर आया वो सेवा भाव पिता की भाँति महसूस हुआ जो अपने बच्चे को अच्छी राह पर ले जाकर आगे बढ़ाने का प्रयत्न कर रहे हैं । इस तरह का एक बेमिसाल व्यक्तित्व है मिश्रा जी का । जो स्वार्थों में नहीं बेहतर सामाजिक व्यवहार में जीना पसंद करते हैं । तहसील बिन्दकी के रहने वाले अधिवक्ता राजेंद्र मिश्रा । अधिवक्ता हित पर हमेशा चर्चा करते रहते हैं और अगर इस बार अधिवक्ताबंधुओं ने मौका दिया तो अधिवक्ताओं को कई सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का काम करेंगे व सर्राफा व्यापारी स्व० गनेश मिश्रा के बेटे है जो बिन्दकी नगर के हजरतपुर ठठराही के रहने वाले हैं ।

मिश्र जी का जीवन अलग परिस्थितियों में रहा । वह परिवार पर आश्रित थे । बाल अवस्था और कष्टों के साथ रहने के बाद भी उनके अंदर समाज को बेहतर बनाने व सही दिशा में ले जाने का जज्बा था और वो आगे बढ़ते रहे ।
वही मिश्रा जी की जन्मतिथि शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर 05 जनवरी 1966 ई० है जिसके अनुसार इस समय मेरी आयु लगभग 59 वर्ष है और मेरी शैक्षिक योग्यता में बीएससी,बी०एड०,एल०एल० बी० है । वही प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय ठाठराही बिन्दकी से की । उसके बाद हाइस्कूल और इण्टर दयानन्द इण्टर कॉलेज बिन्दकी से, बीएससी क्राइस्ट चर्च महाविद्यालय कानपुर, बीएड कानपुर उसके बाद 1992 में एलएलबी की डिग्री हासिल की और समाज को बेहतर दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त है । एक पढ़े-लिखे व्यक्तित्व का व्यक्ति समाज में फैली हुई विडम्बना पर चिंता जताया और समस्याओं पर हमेशा आवाज उठाने के लिए अधिवक्ता बनकर लोगों के साथ खड़े हैं ।
वही 1992- 93 में राजस्व परिषद लखनऊ में वकालत शुरू की उसके बाद 1994 ई० में एक अधिवक्ता के रूप में तहसील बिन्दकी ,जनपद फतेहपुर में समाज सेवा का कार्य निःस्वार्थ भाव से करना शुरू किया । जो कि सराहनीय कदम है । यहाँ पर सोचने वाली बात है कि अगर कोई शानदार व्यक्तित्व,सम्मानित ब्राम्हण, प्रतिष्ठित, व्यहवारिक निष्ठावान ब्राम्हण है और इस बार आदर्श बार एसोसिएशन बिन्दकी में पहली बार अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे हैं ।
अगर अधिवक्ता साथियों ने इस बार मौका दिया तो शासन और बार काउंसिल की जितनी भी योजनाओं होगी वो बिन्दकी बार और अधिवक्ताओं को मिलेगी ।
मिश्राजी के परिवारिक ढांचा जाना तो बहुत ही उदारवादी पारिवारिक वातावरण है । इनके पिता गनेश मिश्रा प्रतिष्ठित सर्राफा व्यापारी के रूप में चर्चित तथा क्षेत्र के हर जाति,धर्म व युवा वर्ग में सम्मानित रूप में दूर दूर तक जाने जाते हैं । मुझे गर्व है पिता पर जिनके मार्गदर्शन में मुझे हर प्रारूपों पर मजबूत बनाया है ।
पिछले लगभग 31 वर्षों से बिन्दकी तहसील में अधिवक्ता के रूप में निस्वार्थ रूप से काम कर रहा हूं और अगर इस बार हमारे अधिवक्ता बधुओं ने साथ दिया तो अधिवक्ताओं हितों में बहुत कुछ काम करना है जो अभी तक किसी भी अध्यक्ष ने नहीं किया होगा ।
