फतेहपुर । मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद फतेहपुर में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य टीमों द्वारा जन्मजात विकृति से पीडित बच्चों का निःशुल्क उपचार मेडिकल कालेज,जिला चिकित्सालय व स्वयंसेवी संस्थानों के माध्यम से कराया गया । जिसमें बच्चों के दिल में छेद, रीढ़ की हड्डी में फोड़ा/जुड़ा न होना,आँखों में मोतिया बिन्द,गूँगे-बहरे बच्चें, होठ व तालु कटा होना,कूल्हे बराबर न होना,पैरों के तलवों का अन्दर की ओर मुड़ा होना,बच्चों में मानसिक विकार आदि है ।
माह अप्रैल 2025 से जुलाई 2025 के मध्य जनपद में कुल 17 ऐसे जन्मजात विकृतियों से पीड़ित बच्चों का उपचार कराया गया है ।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में तैनात मोबइल टीमों द्वारा जनपद के सभी परिषदीय विद्यालयों उच्च प्राथमिक विद्यालयों व ऑगनबाड़ियों में भ्रमण कर शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है ।
यदि कोई बच्चा किसी बिमारी से पीड़ित पाया जाता है तो उसे प्राथमिक उपचार देकर उस क्षेत्र के प्राथमिक/ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बुलाकर विशेषज्ञ डाक्टरों के द्वारा उपचारित कराया जाता है । यदि कोई पीड़ित बच्चा स्वास्थ्य परीक्षण से वंचित रह जाता है तो वह ब्लाक प्रभारी चिकित्साधिकारी से सम्पर्क कर आर०बी०एस०के० टीमों से स्वास्थ्य परीक्षण करा सकता है ।
आर०बी०एस०के० टीगों द्वारा बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) की रोकथाम के लिए सभी विद्यालयों में दस वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए आयरन पिंक गोली (45 एम०जी०) व 10 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए आयरन नीली गोली (60 एम०जी० ) उपलब्ध कराई जाती है । जो बच्चों को सप्ताह में एक बार खिलाई जाती है ।
कक्षा 8 से 12 तक किशोरियों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, किशोरी सुरक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत माहवारी स्वछता के लिए निःशुल्क सेनेटरी पैड भी उपलब्ध कराये जाते हैं ।
जनपद में जिला महिला व पुरूष चिकित्सालय में किशोर व किशोरियों के लिए साथिया केन्द्र के नाम से दो स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किये गये हैं । जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के निर्देशन में किशोर स्वास्थ्य काउन्सलरों द्वारा स्वास्थ्य रूप से बड़े होना, भावनात्मक कल्याण व मानसिक स्वास्थ्य,अन्तवैयक्तिक सम्बन्ध,जीवन मूल्य,जेण्डर समानता,पोषण-स्वास्थ्य स्वच्छता,मादक पदार्थों के सेवन का रोकथाम व प्रबन्धन, प्रजनन स्वास्थ्य एवं एच०आई०वी० की रोकथाम के लिए जागरूक व पीड़ितों को उपचारित किया जाता है ।
