नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के शैक्षणिक संगठन ‘269वें फ़्राइडे ग्रुप’ में बोलते हुए सीजेआई गवई ने कहा कि ‘उन्हें जस्टिस विश्वनाथन के साथ लगभग छह महीने तक बेंच साझा करने का अवसर मिला । इस दौरान बेंच ने अभियुक्तों/दोषियों की संपत्ति को मनमाने तरीके से तोड़ने की प्रवृत्ति के ख़िलाफ़ कई आदेश दिए ।’
यह कार्यक्रम 19 सितंबर को हुआ था लेकिन उनका बयान अब चर्चा में आ गया है ।
अपने फ़ैसले को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक फै़सला जो हम दोनों को बहुत संतोष देने वाला था, वह बुलडोज़र वाला फै़सला था । उस फै़सले के केंद्र में लोगों की समस्याएं और उनकी मुश्किलें थीं । परिवार को सिर्फ़ इस लिए परेशान किया जा रहा था क्योंकि वे ऐसे व्यक्ति के परिवार का हिस्सा थे । जो या तो अपराधी था या कथित अपराधी ।”
इसके अलावा, सीजेआई गवई ने यह भी कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल न्याय संबंधी मामलों पर असर नहीं डालता ,क्योंकि कई ऐसे सीजेआई रहे हैं । जिनका कार्यकाल केवल कुछ महीनों का था, लेकिन उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी ।
