भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बाबरी मस्जिद को लेकर एक बयान दिया है जिस पर विवाद छिड़ गया है ।
न्यूज़लांड्री वेबसाइट के पत्रकार श्रीनिवासन जैन को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व सीजेआई ने कहा कि ‘बाबरी मस्जिद का निर्माण बुनियादी तौर पर अपवित्र कार्य था ।’
श्रीनिवासन ने पूछा था कि “क्या अपवित्र करने को लेकर हिंदू पक्ष ज़िम्मेदार था, जैसे कि दिसम्बर 1949 में मस्जिद में मूर्ति रखना, तो जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘मस्जिद का निर्माण बुनियादी तौर पर अपने आप में अपवित्र कार्य था ।’
इसी इंटरव्यू में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “आपने कहा कि हिंदुओं ने अंदर के चबूतरे को अपवित्र किया,लेकिन बुनियादी अपवित्रता- उस मस्जिद के निर्माण के बारे में क्या । क्या जो कुछ हुआ था आप भूल गए? इतिहास में क्या हुआ, हम भूल गए ?”
उन्होंने कहा कि ‘अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात के पुरातात्विक सबूत पाए थे कि मस्जिद के नीचे मंदिर था,जिसे नष्ट कर मस्जिद बनाई गई ।’
उल्लेखनीय है कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर फ़ैसला दिया था जिसके तहत विवादित भूमि हिंदू पक्ष को मिली मुसलमानों को मस्जिद के लिए 5 एकड़ ज़मीन उपयुक्त जगह पर देने के निर्देश दिए गए थे । इस फ़ैसले को सुनाने वाले जजों के पैनल में चंद्रचूड़ भी शामिल थे ।
वरिष्ठ पत्रकार और ‘द वॉयर’ के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने एक्स पर लिखा,”चंद्रचूड़ अब स्वीकार करते हैं कि उन्होंने बाबरी मस्जिद की मौजूदगी को ही ‘अपवित्रता’ के रूप में देखा था । ये एक ऐसी धारणा है जो उपद्रवियों के साथ मेल खाती है ।”
उन्होंने लिखा, “यह साफ़ है कि उन्होंने मामले का फैसला क़ानून या सबूतों के आधार पर नहीं,बल्कि आस्था के आधार पर किया था,लेकिन ज़ाहिर है कि वह फैसले में ऐसा नहीं कह सके । उन्होंने अब अपनी प्रतिष्ठा को धूमिल करते हुए और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के नाम को हमेशा के लिए कलंकित करते हुए, सारा राज़ खोल दिया है ।”
