फतेहपुर । मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के कारण मातृ मृत्यु आज भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है । जबकि समय पर पहचान, नियमित जांच एवं सुरक्षित प्रसव के माध्यम से अधिकांश मातृ मृत्यु की रोकथाम संभव है ।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं— जैसे जननी सुरक्षा योजना (JSY), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK)तथा प्रसव-पूर्व एवं प्रसव-पश्चात निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं—के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से अपील करते हुए कहा कि गर्भ ठहरने के तुरंत बाद निकटतम स्वास्थ्य केंद्र अथवा आशा कार्यकर्ता के माध्यम से पंजी करण अवश्य कराएं तथा कम से कम चार प्रसव-पूर्व जांच (ANC) अनिवार्य रूप से कराएं । चार प्रसव-पूर्व जांचों में से कम से कम एक जांच प्रत्येक माह आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस (01,09,16 एवं 24तारीख) को अपने नजदीकी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला महिला चिकित्सालय में स्त्री रोग विशेषज्ञ या एमबीबीएस चिकित्सक से अवश्य कराएं ।
उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप, अत्यधिक रक्तस्राव, तेज सिरदर्द, हाथ-पैर या चेहरे में सूजन, तेज बुखार, झटके अथवा किसी भी अन्य चेतावनी संकेत की स्थिति में बिना विलंब किए तुरंत निकटतम सरकारी चिकित्सा संस्थान में संपर्क करना अत्यंत आवश्यक है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में घर पर प्रसव न कराएं प्रसव केवल मान्यता प्राप्त सरकारी चिकित्सा संस्थानों—जैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला अस्पताल— में ही कराएं, जहाँ प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्स 24×7 उपलब्ध हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन प्रसूति सेवाएं प्रदान की जाती हैं । प्रसव के उपरांत माँ एवं नवजात शिशु की सुरक्षा हेतु चिकित्सा संस्थान में कम से कम 48 घंटे अवश्य रुकें ।
उन्होंने बताया कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के अंतर्गत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव, सिजेरियन ऑपरेशन, दवाइयाँ, जांच, रक्त, भोजन तथा आने-जाने की सुविधा पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है तथा इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क लिया जाना प्रतिबंधित है ।
साथ ही सभी आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ,स्वयं सहायता समूहों,स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से अपेक्षा की गई कि वे समुदाय स्तर पर बैठकों, गोष्ठियों एवं घर-घर संपर्क के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, संस्थागत प्रसव, संतुलित पोषण,एनीमिया की रोकथाम तथा प्रसव के बाद 42 दिनों तक जच्चा-बच्चा की आवश्यक देखभाल के प्रति जागरूक करें ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद स्तरीय नियंत्रण कक्ष (हेल्पलाइन) 8400418691 तथा एम्बुलेंस सेवा 108/102 के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के लिए आपातकालीन परिवहन की सुविधा 24×7 उपलब्ध है ।
अंत में उन्होंने जनपद के सभी नागरिकों से अपील की कि गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थान तक पहुँचाने में सहयोग प्रदान कर मातृ मृत्यु की रोकथाम के इस जन-जागरूकता अभियान को सफल बनाएं ।
