– शिवपुराण की कथा सर्वोत्तम,कल्याणकारी शिव सब पर करते हैं कृपा
बिन्दकी/फतेहपुर । कस्बे के महाकाली मंदिर ठठराही में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में जहां भक्तों को श्री कृष्ण की रासलीला आनंदित कर रही है । वहीं महाशिवपुराण की कथा कवि अमृत वर्षा हो रही है । व्यास पंडित राजीव शरण शास्त्री ने आज नारद के मोह व अहंकार की कथा सुनाई ज़ब कि मंगल वार को चंचला और बिन्दुक की कथा कह कर शिव जी के प्रताप और शिवपुराण के महत्त्व पर प्रकाश डाला ।
ब्यास राजीव शरण शुक्ल ने कहा कि शिव पुराण में नारद मोह की कथा भगवान विष्णु की लीला और नारद मुनि के अहंकार (घमंड) के भंग होने से जुड़ी है । जिसमें नारद जी ने अपनी काम-विजय के अभिमान में विश्वमोहिनी राजकुमारी को पाने के लिए भगवान विष्णु से उनका रूप माँगा । जिसके फलस्वरूप विष्णु ने उन्हें बंदर का रूप दे दिया और राजकुमारी ने विष्णु का वरण किया । जिससे नारद जी का घमंड टूटा और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ । जिसके बाद उन्होंने विष्णु और शिवगणों को शाप दिया । जिससे आगे चलकर राम-रावण की कथा का सूत्रपात हुआ । नारद मुनि को अपनी तपस्या और काम पर विजय के कारण घमंड हो गया कि उनसे बड़ा कोई भक्त नहीं है । उन्होंने शिवजी और फिर विष्णुजी को अपनी इस विजय की कथा सुनाई । भगवान विष्णु ने नारद के अहंकार को दूर करने के लिए एक योजना बनाई ।
उन्होंने एक मायावी नगर में विश्व मोहिनी नामक राजकुमारी की स्वयंवर का आयोजन करवाया । नारद मुनि राजकुमारी के सौंदर्य पर मोहित हो गए और उसे पाने की इच्छा से भगवान विष्णु से हरि रूप,(जिसका अर्थ बंदर भी होता है) मांग लिया ताकि वे स्वयंवर जीत सकें।विश्वमोहिनी ने भगवान विष्णु (जो स्वयं राजा रूप में थे) का वरण किया और नारद को बंदर का रूप मिला जिससे उनका घमंड चूर-चूर हो गया और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ ।अपने अपमान से क्रोधित होकर नारद ने विष्णु को मनुष्य योनि में जन्म लेने और स्त्री से वियोग का शाप दिया और शिवगणों को रावण और कुंभकरण बनने का शाप दिया । जिससे त्रेतायुग में राम -रावण युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार हुई । यह कथा दर्शाती है कि कैसे ज्ञानियों को भी अहंकार व मोह हो सकता है और ईश्वर अपनी लीला से उनका उद्धार करते हैं ।
इससे पूर्व मंगलवार को उन्होंने शिव पुराण में चंचला और उसके पति बिंदुक की वर्णित कथा सुनाई जो पति-पत्नी के बीच विश्वास, धर्म और पश्चाताप के महत्व को दर्शाती है । जहाँ पापी चंचला ने शिव पुराण की कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त किया और उसके प्रभाव से उसके पति बिंदुक को भी शिवलोक मिला । जो वैवाहिक जीवन में ईमानदारी और भक्ति की सीख देती है । चंचला और बिंदुक एक दम्पति थे । लेकिन बिंदुक के दुराचरण और उपेक्षा के कारण चंचला का मन भी भटकने लगा और वह भी गलत रास्ते पर चली गई । पति की मृत्यु के बाद, चंचला को अपने कर्मों का पश्चाताप हुआ । जब उसने एक संत से शिव पुराण की कथा सुनी तो उसे अपने पापों का भय लगा और संसार से वैराग्य हो गया । वह रोने लगी और उद्धार की याचना करने लगी । चंचला ने शिव पुराण की कथा को पूरी श्रद्धा से सुना । उसके मन में शिव भक्ति और वैराग्य जागा । जिससे उसे शिवलोक जाने का मार्ग मिला । चंचला के शरीर त्यागने के बाद, शिव के गण उसे शिवलोक ले गए । वहां माता पार्वती ने शिव से उसके उद्धार की प्रार्थना की । शिव ने चंचला और बिंदुक दोनों को क्षमा किया और उन्हें शिवलोक में स्थान दिया, जहां वे सुखपूर्वक रहने लगे । वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास और ईमानदारी होनी चाहिए । पाप-पुण्य का फल मिलता है । लेकिन पश्चाताप और शिव की भक्ति से उद्धार संभव है ।
ब्यास जी के अनुसार शिव पुराण का श्रवण और भगवान शिव की भक्ति से व्यक्ति भवसागर पार कर सकता है । यह कथा बताती है कि कैसे चंचला ने अपने गलत आचरण से मुक्ति पाई और पति के साथ शिवधाम में स्थान प्राप्त किया । जो शिव पुराण की महिमा को दर्शाता है ।
