बिन्दकी/फतेहपुर । मां काली जी देवी मंदिर परिसर में चल रहे 11 दिवसीय शतचंडी महायज्ञ मेला के 9वें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही लोगों ने मां काली देवी के दर्शन कर मन्नत मांगी यज्ञ मंडप की परिक्रमा किया । वहीं मंदिर पर कर नहीं लगे पंडाल में सुदामा चरित्र का सुंदर मंचन किया गया । जिसको देख कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए ।
नगर के मोहल्ला हजरतपुर ठठराही में चल रहे 11 दिवसीय शतचंडी महायज्ञ मेला के नौवे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी । सोमवार की सुबह से ही श्रद्धालु मां देवी के दरबार में पहुंच कर दर्शन कर प्रसाद चढ़ कर आशीर्वाद का रहे थे और मन्नत मांग रहे थे ।
ऐसी मान्यता है कि जो भी मां काली देवी से मन्नत मांगी जाती है मां काली देवी उसकी मन्नत अवश्य पूरी करती है । मेले में आई महिलाओं ने खरीदारी की बच्चों ने भी गुब्बारे खिलौने खरीदे । उधर मंदिर परिसर में बनाए गए विशाल पंडाल में सुदामा चरित्र का सुंदर मंजन किया गया । जिसको देखकर श्रद्धालु भाव विभोर रहे ।
मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्री कृष्ण और सुदामा का गुरुकुल में साथ पढ़ना जहां वे अपनी मित्रता की शपथ लेते हैं । एक और जहां भगवान श्री कृष्णा राजा बन जाते हैं । वहीं सुदामा गरीब हो गए और उनकी दशा दिन दुखी हो गई । सुदामा अपनी पत्नी की सलाह पर भगवान श्री कृष्ण से मदद मांगने जाते हैं । सुदामा का कृष्ण के महल में पहुंचना और भगवान कृष्ण का उन्हें पहचानना और गले लगाना श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया । सुदामा द्वारा लाए गए प्रसाद को भगवान श्री कृष्ण ने ग्रहण किया और सुदामा जी के जीवन को भी बदल दिया सुदामा जी की झोपड़ी महल बन जाती है और उनकी गरीबी का अंत हो जाता है । मंजन के द्वारा यह सीख दी गई की सच्ची मित्रता में अमीरी गरीबी का भेद नहीं देखा जाता ।
