फतेहपुर (बिन्दकी) । कहने को तो शिक्षा एक सेवा है । लेकिन जनपद के बिन्दकी स्थित सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल के लिए यह “मुनाफाखोरी” का एक जरिया बनता नजर आ रहा है । एक पीड़ित अभिभावक की शिकायत ने शहर के नामी स्कूल और एक खास पुस्तक भंडार के बीच के ‘काले गठजोड़’ की पोल खोल दी है ।
क्या है पूरा मामला ? रविंद्र कुमार शुक्ला नामक एक जागरूक अभिभावक ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर स्कूल की मनमानी को उजागर किया है ।
शिकायत के मुताबिक,उनका बेटा जयपुरिया स्कूल के बिन्दकी कैंपस में कक्षा 3 का छात्र है । स्कूल की ओर से किताबों की एक लिस्ट थमा दी गई । लेकिन जब वह बाजार निकले तो पता चला कि ये किताबें पूरे शहर में सिर्फ “विद्यार्थी पुस्तक भंडार” पर ही उपलब्ध हैं । हैरानी की बात तब हुई जब किताबों के सेट की कीमत 8,500 रुपये बताई गई ।
जब अभिभावक ने इस भारी-भरकम राशि का ‘पक्का बिल’ माँगा तो दुकानदार ने साफ इनकार कर दिया। आखिर क्यों स्कूल की किताबें किसी और दुकान पर नहीं मिल रही हैं ? क्या दुकानदार और स्कूल प्रबंधन के बीच कमीशन का खेल चल रहा है ?
और बिना बिल के लाखों का कारोबार करके क्या सरकार को चूना लगाया जा रहा है ?
जाँच की सुस्त चाल शिकायत संख्या 40017226010428 के माध्यम से यह मामला माध्यमिक शिक्षा विभाग तक पहुँच चुका है । माध्यमिक शिक्षा विभाग, विद्यालयों द्वारा अवैध वसूली/अधिक फीस ‘लंबित’ (08 अप्रैल से 23 अप्रैल की समय सीमा दी गई है)
अभिभावक ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस सिंडिकेट की जांच की जाए । आखिर क्यों गरीब और मध्यमवर्गीय अभिभावकों को एक खास दुकान से महंगे दामों पर सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है ?
क्या जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) इस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, या फिर यह फाइल भी ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दी जाएगी ?
