बांग्लादेश । देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के सरकारी आवास ‘गणभवन’ में ‘जुलाई जनविद्रोह स्मारक संग्रहालय’ का उद्घाटन किया गया । यह संग्रहालय जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों की याद में बनाया गया है ।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने राजधानी ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर स्थित गणभवन में संग्रहालय का उद्घाटन किया । यह कार्यक्रम 5 अगस्त के दिन आयोजित किया गया । इस दिन साल 2024 में शेख़ हसीना देश छोड़कर भारत आई थीं ।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच हुए छात्र आंदोलन (जुलाई जनविद्रोह) के दौरान 1,400 तक लोगों की मौत हुई थी ।
रिपोर्ट में कहा गया था कि हसीना सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों से सख्त कार्रवाई कराई थी ।
सरकारी नौकरियों में आरक्षण (कोटा) व्यवस्था को लेकर शुरू हुए व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद शेख़ हसीना ने 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ दिया था । इसके तीन दिन बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में ज़िम्मेदारी संभाली थी ।
सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के अनुसार गणभवन परिसर में बने इस संग्रहालय का उद्देश्य 2024 के जनआंदोलन के इतिहास को सुरक्षित रखना और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के बलिदान को सम्मान देना है । इस संग्रहालय की स्थापना और गणभवन को संरक्षित करने की प्रक्रिया की शुरुआत मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने की थी ।
