कुछ महत्वपूर्ण तथ्य —
✓ एसटीएफ ने इटौंजा टोल प्लाजा का सर्वर किया जब्त ।
✓ सर्वर सीज होने से टोल वसूली हुई पूरी तरह बंद ।
✓ एनएचएआई और टोल एजेंसी ने कार्रवाई का किया विरोध ।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) पर इटौंजा स्थित टोल प्लाजा पर यूपी STF ने बड़ी कार्रवाई की है । STF टीम ने मंगलवार को छापेमारी कर टोल प्लाजा का सर्वर, CCTV कैमरों के DVR और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए ।
फर्जी FASTag से टोल चोरी का खेल
STF के मुताबिक फर्जी FASTag और दूसरे वाहनों के नंबर का इस्तेमाल कर टोल चोरी और ऑनलाइन चालान से बचने का संगठित गिरोह सक्रिय था । आरोपी असली वाहन के बजाय किसी दूसरे नंबर पर FASTag बनवाते थे । उसी से टोल पार करते थे ताकि चालान भी दूसरे नंबर पर जाए ।
इस मामले में सोमवार को सीतापुर निवासी मुनीश को गिरफ्तार किया गया था । उसके साथी सिराज और रियाज की तलाश जारी है । ARTO की शिकायत पर सरोजनीनगर थाने में दर्ज FIR की विवेचना STF कर रही है ।
टोल वसूली ठप, लंबा जाम
सर्वर सीज होने के बाद मंगलवार दोपहर 2 बजे से टोल वसूली पूरी तरह बंद हो गई । 25 हजार से ज्यादा वाहन बिना टोल दिए गुजर चुके हैं । रोजाना 42-45 हजार वाहन इस टोल से गुजरते हैं । एजेंसी को रोज 18-20 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है । वाहनों के नंबर मैनुअल नोट किए जा रहे हैं । जिससे करीब 1 किमी लंबी लाइन लग गई और चालक परेशान हुए ।
STF का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हुई है और सर्वर से 3 साल का डेटा निकाला जा रहा है । वहीं NHAI और टोल संचालक एजेंसी लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड ने विरोध जताया है ।एसटीएफ ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कोर्ट के आदेश के आधार पर की गई है । एनएचएआइ और टोल संचालक एजेंसी लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड ने सर्वर सीज किए जाने पर विरोध जताया है । एजेंसी के अनुसार एक जनवरी से 31 मार्च 2026 तक वाहनों का डाटा और फास्टैग लेनदेन की जानकारी पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है । उसका कहना है कि सर्वर भी पत्राचार के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता था ।
एनएचएआइ के परियोजना निदेशक नवरत्न ने बताया कि एसटीएफ अधिकारियों ने जांच पूरी होने के बाद जल्द सर्वर लौटाने की बात कही है । टोल एजेंसी के अनुसार एसटीएफ ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि टोल पर किस गड़बड़ी की जांच की जा रही है । एनएचएआइ ने भी एसटीएफ को 28 से 30 पन्नों में मांगी गई समग्र जानकारी उपलब्ध कराई थी ।
टोल के रेजीडेंट इंजीनियर प्रमोद सिंह ने बताया कि उन्हें किसी गड़बड़ी की जानकारी नहीं है । एसटीएफ के विशेषज्ञ स्वयं सर्वर की जांच कर रहे थे और इस दौरान टोल कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया था । एजेंसी के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था में करीब 15 दिन लग सकते हैं । इस दौरान रोज 18 से 20 लाख रुपये राजस्व नुकसान होने का अनुमान है । राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रतिदिन करीब 42 से 45 हजार वाहन गुजरते हैं ।
