कार्यकाल खत्म होते ही बदली व्यवस्था, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष का मानदेय भी बंद
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए गए पूर्व ग्राम प्रधानों को अब मानदेय नहीं मिलेगा । शासन की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार प्रशासक के रूप में कार्य करने वाले पूर्व प्रधानों को निर्वाचित ग्राम प्रधान की तरह प्रतिमाह मिलने वाला 5 हजार रुपये का मानदेय देय नहीं होगा । पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने के साथ ही उनके निर्वाचित पद से जुड़े वित्तीय अधिकार भी समाप्त हो जाते हैं ऐसे में प्रशासक के रूप में काम कर रहे पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रधान पद का मानदेय देने का प्रावधान नहीं है ।
विकास कार्यों में खर्च होगी बची राशि
मानदेय बंद होने से सरकार पर होने वाला खर्च बचेगा । इस राशि को ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च किए जाने की व्यवस्था बताई जा रही है। इससे पंचायतों के विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धनराशि का उपयोग स्थानीय जरूरतों के मुताबिक किया जा सकेगा ।
ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष का मानदेय भी नहीं
इस व्यवस्था का असर केवल ग्राम प्रधानों तक सीमित नहीं है ।कार्यकाल समाप्त होने के बाद संबंधित पंचायत संस्थाओं में प्रशासकीय व्यवस्था लागू होने पर ब्लॉक प्रमुख का 11,300 रुपये और जिला पंचायत अध्यक्ष का 15,500 रुपये मासिक मानदेय भी नहीं मिलेगा ।
प्रदेश में पंचायतों का बड़ा नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में कुल 58,213 ग्राम पंचायतें, 827 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं । पंचायत चुनाव तक प्रशासकीय व्यवस्था के दौरान निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर नियुक्त प्रशासकों के अधिकार और वित्तीय व्यवस्था को लेकर यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और प्रशासकों की व्यवस्था को लेकर आगे आने वाले सरकारी आदेशों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं ।
