लखनऊ । उत्तर प्रदेश में गांव के लोगों के लिए बड़ी खबर है । योगी सरकार ने ग्रामीण आबादी की जमीन से जुड़े सबसे बड़े कानून को मान्यता दे दी है ।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 23-24 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक- 2025 यानी घरौनी कानून पारित हो गया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह विधेयक पेश किया । इसके पास होते ही घरौनी को अब खतौनी की तरह कानूनी दस्तावेज का दर्जा मिल गया है ।
पहले स्वामित्व योजना के तहत दी जा रही घरौनी सिर्फ एक प्रशासनिक कागज थी । अब कोर्ट में भी सबूत के तौर पर मान्य होगी ।
क्या है नया सिस्टम केंद्र की
1. PM स्वामित्व योजना के तहत गांवों में ड्रोन सर्वे से हर घर की मैपिंग हो रही है । उसी रिकॉर्ड को अब कानून ने मान्यता दी है ।2. घरौनी में मालिक का नाम-पता, फोन नंबर, मकान नंबर, भूखंड का क्षेत्रफल,नक्शा (रेखाचित्र) और लोकेशन दर्ज होगी ।
3. हर जिले में DM को अभिलेख अधिकारी (Record Officer) बनाया गया है । राजस्व परिषद के नियम से ही नामांतरण होगा ।
4. अब वरासत,उत्तराधिकार,बैनामा-बिक्री या लिपिकीय त्रुटि सुधार का काम भी आसान होगा । पहले इसके स्पष्ट नियम नहीं थे ।
कितने गांवों को लाभ
सरकारी आंकड़े के मुताबिक 1,10,344 गांवों को इस योजना में अधिसूचित किया गया है । जिनमें से 90,573 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है । 9 मई 2025 तक 1.06 करोड़ घरौनियां तैयार हो चुकी हैं जिनमें से 1.01 करोड़ से अधिक घरौनियां ग्रामीणों को बांटी जा चुकी हैं ।
यानी प्रदेश के करीब पौने दो करोड़ ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा ।
घरौनी मालिक को क्या-क्या लाभ होगा ?
लोन का सिस्टम
अब तक गांव की आबादी की जमीन पर बैंक लोन नहीं देता था । अब घरौनी को गिरवी रखकर होम लोन, कृषि लोन, बिजनेस लोन और KCC तक ले सकेंगे । बैंक इसे खतौनी की तरह ही वैध मानेगा । विवाद खत्म वर्षों से चले आ रहे भाई-बंटवारे और पड़ोसी विवाद में घरौनी पक्का सबूत होगी । बिक्री और वरासत अब घरौनी पर नाम चढ़ाना-उतरानावसीयत और बिक्री रजिस्ट्री आसान होगी ।
अगर दूसरे ने कब्जा किया हो तो क्या करें
कानून में इसका भी प्रावधान है । अगर किसी ने आपके आबादी के घर/प्लॉट पर अवैध कब्जा कर लिया है तो
1. आप अपनी घरौनी के आधार पर तहसील / DM (अभिलेख अधिकारी) के यहां आपत्ति दर्ज करा सकते हैं ।
2. घरौनी कानूनी दस्तावेज होने से राजस्व न्यायालय और सिविल कोर्ट में बेदखली का मुकदमा मजबूत होगा ।
3. ड्रोन मैप में दर्ज नक्शा ही अंतिम माना जाएगा, इसलिए कब्जा करने वाला फर्जी दावा नहीं कर सकेगा ।
सरकार का कहना है कि इस कानून से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गेम चेंजर लाभ मिलेगा और गांव के घरों को भी शहर के घरों जैसी कानूनी पहचान मिलेगी ।
