फतेहपुर,21 नवम्बर । मलवां विकास खंड के जलाला गाँव मे चल रही संगीतमय श्रीमदभागवत कथा के तृतीय दिवस सोमवार को कथा व्यास आचार्य राघव महाराज ने बताया किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है । वहां आपका,अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो । यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर नही जाना चाहिए चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो । कथाव्यास ने तृतीय दिवस सती चरित्र,ध्रुव चरित्र प्रसंगो को विस्तार से सुनाया । उन्होंने बताया भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा ।
कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया । परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है । भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है । भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है । उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है । भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की । कथा समापन पर आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया ।
इस मौके पर प्रमुख रूप से राजवीर सिंह परिहार,युवा विकास समिति के प्रवक्ता आलोक गौड़,हर्ष गुप्ता,अनूप सिंह,शीतल दीन यादव,अंशू बाजपेई,सत्यवान मिश्रा,संदीप पटेल,सूरज सिंह गौतम,अनुपम मिश्रा,गायक भोला द्विवेदी रहे ।
