“लेत चाप तुरतहि चढि गयऊ—” परशुराम को होगई श्रीराम के अवतार की पुष्टि ।

बकेवर/फतेहपुर,05 दिसम्बर । बकेवर कस्बे के समीपवर्ती ग्राम बरिगवां में आयोजित मैथिली अधिवेशन में सीता स्वयंबर में राजा जनक की घोषणा “तजहू आश निज निज गृह जाहू, लिखा न विधि वैदेही विवाहू”को सुनकर लक्ष्मण का विरोध प्रकट करने के बाद श्रीराम द्वारा शिव जी के धनुष खंडन, परशुराम का मिथिला में आगमन और अपने गुरुदेव भगवान शंकर के खंडित अजगव को देखकर क्रोधित हो कर मौजूद राजाओं को भयाक्रांत करने पर लक्ष्मण का विरोध करने परशुराम के साथ संवाद,श्रीराम को अवतार की पुष्टि के लिए “राम रमापति कर धनु लेहू, खौचहु चाप मिटहि संदेहू” के साथ “रेत चाप तुरतहि चढि गयहू” को देखकर श्रीराम की अर्चना कर पुनः तपस्या के लिए हिमाचल प्रस्थान का रोचक प्रसंग देख दर्शक अभिभूत हो गए ।
लीला मंचन के दौरान बताया गया कि जब भगवान श्रीराम ने धनुष भंजन किया तो मादिरांचल पर्वत पर तपस्या में लीन परशुराम जी की तपस्या भंग हो गई और उन्हें ज्ञात हुआ कि भगवान शंकर का धनुष टूट गया है । तब वह क्रोध से आग बबूला होकर मिथला आ धमकते हैं और राजा जनक से पूछते हैं कि भगवान शिव के धनुष को तोड़ने का दुस्साहस किसने किया है । तब स्वयंबर में उपस्थित सभी राजाओं का परिचय परशुराम जी से कराया जाता है ।
सभी राजा परशुराम को प्रणाम कर वापस अपने-अपने देश लौट जाते हैं । राजा जनक अपनी पुत्री सीता का भी परिचय कराते हैं और परशुराम जी उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देते हैं । धनुष तोड़ने का कारण पूछने पर राजा जनक ने बताया कि एक दिन खेल ही खेल में सीता ने शिव धनुष उठा लिया था । तभी मैंने प्रतिज्ञा की थी कि जो भी योद्धा इस धनुष का भंजन करेगा । उसी के साथ सीता का स्वयम्वर होगा ।
राजा जनक ने कहा कि आज मेरा प्रण पूरा हुआ है । तब राजा जनक की बातों को सुनकर परशुराम जी आग बबूला हो जाते है एवं धनुष भंजन करने पर खरी-खोटी सुनाने लगते हैं । परशुराम जी के कटु शब्द लक्ष्मण जी को नागवार गुजरते हैं और वह भी परशुराम जी को खरी-खरी कहने लगते हैं । वहीं दूसरी ओर भगवान श्रीराम परशुराम जी को प्रणाम कर बताते हैं कि भगवान शिव के धनुष को मैंने ही तोडा है परंतु परशुराम जी को उनकी बातों पर विश्वास नहीं होता है अंत में परशुराम जी अपना धनुष उतारकर भगवान श्रीराम को देते हुए कहते हैं कि यदि आप विष्णु के अवतार हैं तो इस धनुष को चला के बताइये जैसे ही प्रभु श्रीराम धनुष को उठाते हैं तभी परशुराम जी एकदम शांत हो जाते है ।
राम विवाह के अवसर पर राम बारात बैंड बाजे के साथ धूमधाम से निकाली गयी राम बारात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए । इन मंचनो के साथ रामलीला कार्यक्रम का भी समापन हो गया ।
इस मौके पर बरीगवां रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशोक मिश्रा,सतेंद्र वर्मा ,भईयाजी अवस्थी करुणाकर ,दीपू अवस्थी,गौरव अवस्थी,ओमप्रकाश ,राजेश, विपिन, वहरुद्दीन सिद्दीकी, ताहिर सिद्दीकी सहित सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे ।
