नोएडा : देश आज भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू यानि चाचा नेहरू की जयंती मना रहा है । लेकिन, दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में दुकानों,ढाबों और कार गैराज समेत कई जगहों पर बच्चे बाल श्रम करते नजर आ रहे हैं । ये बच्चो स्कूल जाने की उम्र में अपने मासूम कंधों पर घर की जिम्मेदारी ढो रहे हैं । देश में बाल श्रम रोकने का कानून है । लेकिन उस पर प्रभावी ढंग से अमल नहीं होता है । यही कारण है कि इन बच्चों के हाथों में किताबें नहीं हैं । राजधानी दिल्ली समेत देशभर से बाल श्रम को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं ।
पूरे देश में बीते एक साल में कुल लगभग 13 हजार बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है । मात्र राजधानी दिल्ली ही में लगभग 800 बच्चों को जनवरी से लेकर नवंबर तक मुक्त कराया गया है ।
वहीं, नोएडा में नाबालिग बच्चों को बाल मजदूरी से आजादी दिलाने के लिए नोएडा पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया था । इस अभियान के तहत 19 ऐसे नाबालिग बच्चों को आजाद कराया गया है । जो रेस्टोरेंट और फर्नीचर की दुकानों में सहायक के तौर पर काम कर रहे थे ।
बाल श्रम कानून पर प्रभावी अमल नहीं
बचपन बचाओ आंदोलन एनजीओ ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर राजधानी में बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है । एनजीओ के कार्यकारी निदेशक कहते हैं कि बाल तस्कर बच्चों को दूसरे राज्यों से लाते हैं और फिर उन्हें बंधुआ मजदूरी में झोंक देते हैं । तमाम कानूनों के बाद भी बाल मजदूरी पर रोक नहीं लग पा रही है । रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ नागरिक समाज और गैर सरकारी संगठनों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी ।
गौतमबुद्ध नगर में एक से 30 जून तक चला अभियान
गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के आदेश पर बाल मजदूरी के खिलाफ यह अभियान चलाया गया । पुलिस ने एक से लेकर 30 जून तक यह विशेष अभियान चलाया । इस अभियान का उद्देश्य बाल मजदूरी कर रहे बच्चों और सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों को इन कामों से आजादी दिलाना था । श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन अधिकारी, चाइल्ड लाइन नोएडा और एचपीयू की टीमें साथ मिलकर बच्चों को बाल मजदूरी से आजादी दिलाने के लिए काम कर रहीं हैं ।
क्या है बाल श्रम अधिनियम
बाल श्रम अधिनियम 1986 के तहत अगर कोई व्यक्ति अपने होटल,फैक्ट्री, दुकान और अन्य किसी भी जगह पर 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाता है तो इसे कानून अपराध माना जाता है। देश में बाल श्रम पर पाबंदी है । ऐसा करने वालों को दो साल की जेल हो सकती है । उस पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया जा सकता है ।
