कोरबा/पाली । ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की बुनियाद पंचायत को माना जाता है । लेकिन जब पंचायत ही सालों से मंच में संचालित हो रहा हो और शासकीय उचित मूल्य की दुकान सामुदायिक भवन में तो इसे प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ही कहा जा सकता है । पाली तहसील के ग्राम पंचायत डोंगानाला की यही तस्वीर है । जहां समय की मार झेलते हुए पिछले 01 साल से पंचायत कार्यालय भवन और शासकीय उचित मूल्य की दुकान खंडहर में तब्दील हो चुका है तथा पंचायत का कामकाज एक मंच में तो राशन दुकान सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है ।
जनपद पंचायत पाली का डोंगानाला तकरीबन 1800 जनसंख्या वाला ग्राम पंचायत है । इस पंचायत में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले लगभग 60 परिवार के बिरहोर जनजाति भी निवासरत हैं । पाली से बिलासपुर जाने वाले मुख्य सड़क से करीब 02 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव में विकास और बुनियादी सुविधा की स्थिति अन्य पंचायतों की तुलना में कुछ बेहतर है । लेकिन यहां पंचायत भवन और शासकीय उचित मूल्य दुकान की समस्या से जूझ रहा है ।
जानकारी के मुताबिक यह पंचायत विगत मध्यप्रदेश शासन काल के दौरान वर्ष 1996- 97 में आस्तित्व में आया था । जहां के प्रथम सरपंच गुलाब सिंह निर्वाचित हुए थे । तब वर्ष 2000 में यहां पंचायत कार्यालय भवन व वर्ष 2002 में सोसायटी भवन का निर्माण हुआ था । लेकिन समय के साथ उक्त भवन धीरे- धीरे जर्जर होता चला गया और आज स्थिति यह है कि पंचायत कार्यालय और उचित मूल्य की दुकान भवन लगभग खंडहर की स्थिति में आ चुका है । यहां भवन के अभाव में पंचायत प्रतिनिधि मंच में बैठकर ग्राम सभा,बैठक सहित अन्य पंचायती कामकाज निपटा रहे है ।
वहीं राशन दुकान का संचालन सामुदायिक भवन में होने से सामाजिक गतिविधियों के लिए ग्रामीणों को भवन ना होने की वजह से परेशानी झेलनी पड़ रही है । स्थानापन सरपंच श्रीमती जान बाई का कहना है कि तात्कालीन सरपंच के कार्यकाल में उपेक्षित पंचायत व राशन दुकान भवन टूट- फुट कर बदहाल हो चुका है । जिसके कारण पिछले एक साल से मंच में ग्राम सभा का बैठक सहित पंचायत के दूसरे आवश्यक बैठकें और पंचायती कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा सामुदायिक भवन में राशन दुकान संचालन होने से स्थानीय ग्रामीणों को गांव में होने वाले सामाजिक कार्यों के दौरान परेशानी हो रही है । लेकिन सोसायटी भवन जर्जर होने की वजह से ग्रामीण सामुदायिक भवन में राशन दुकान संचालन का विरोध भी नही कर पा रहे है । वहीं उपसरपंच श्रीमती चित्रलेखा कश्यप ने बताया कि अस्थायी रूप से पंचायत और राशन दुकान का संचालन हो रहा है । जिसकी मांग को लेकर जिले के सरकारी पदाधिकारियों को दो-तीन बार आवेदन दिया जा चुका है । लेकिन इसके पहल की ओर अधिकारियों ने अबतक रुचि नही दिखाई है । ऐसे में साफ पता चलता है कि जिले के विकास की जिम्मेदारी जिन्हें दी गई है वे इसमें दिलचस्पी नही ले रहे है और जनप्रतिनिधि भी निष्क्रिय बने हुए है । इससे ग्रामीणों में हताशा व नाराजगी है ।
