जयपुर । राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में रह रहे याचिकाकर्ता परिवारों को स्वतंत्र विद्युत कनेक्शन नहीं देने को संविधान के अनुच्छेद-21 के विपरीत माना है ।
कोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में डवलपर को सिंगल पाइंट विद्युत कनेक्शन देने के प्रावधान के बावजूद याचिकाकर्ता परिवारों को स्वतंत्र विद्युत कनेक्शन का हक दिलाया है ।
कोर्ट ने जयपुर डिस्कॉम को निर्देश दिया कि सभी पात्र याचिकाकर्ता ओं को औपचारिकताएं पूरी कर दो महीने में बिजली कनेक्शन जारी किए जाएं । न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश रवि चिरानिया की खंडपीठ ने जनक सिंह हाडा व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया ।
कोर्ट ने कहा कि विद्युत कंपनी डवलपर की सुविधा या इच्छा पर निर्भर नहीं है । ऐसे में जयपुर विद्युत वितरण निगम (जेवीवीएनएल) का याचिकाकर्ताओं को स्वतंत्र कनेक्शन देने से इनकार करना न केवल मनमाना है । बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है ।
10 साल से कनेक्शन से वंचित : याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता भुवनेश कुमार गोयल और श्रुति गोयल ने बताया कि वे जयपुर की वाटिका इंफोटेक सिटी स्थित ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं । उन्हें डवलपर को सिंगल पाइंट कनेक्शन के प्रावधान के कारण पिछले 10 वर्षों से स्वतंत्र विद्युत कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है । पानी और बिजली जीवन के लिए आवश्यक हैं । ऐसे में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में सिंगल पाइंट विद्युत कनेक्शन का प्रावधान अनुच्छेद-21 के विपरीत है ।
डिस्कॉम की आपत्ति खारिज : जयपुर डिस्कॉम की ओर से अधिवक्ता सर्वेश जैन ने कहा कि डवलपर ने विद्युत कनेक्शन के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं कराया है । इस लिए कनेक्शन जारी नहीं किया जा सकता । इस पर कोर्ट ने कहा कि कोई भी प्रावधान बिजली कनेक्शन से बाधा नहीं बन सकता । हर पात्र परिवार को उसकी आवश्यकता के अनुरूप विद्युत कनेक्शन मिलना चाहिए ।
